8th Pay Commission: कर्मचारियों की सैलरी हाइक पर नया अपडेट! क्या फिटमेंट फैक्टर 2.57 पर ही लगाएगी सरकार ब्रेक?

8वें वेतन आयोग को लेकर हर दिन कोई ना कोई रिपोर्ट सामने आ रही है. कभी फिटमेंट फैक्टर ज्यादा होने की खुशखबरी मिलती है तो कभी इसके जल्द लागू होने के बारे में बताया जाता है. हालांकि अभी जो हम खबर बताने जा रहे हैं वो थोड़ा निराश करने वाली है. लाखों मौजदूा कर्मचारी और पेंशन होल्डर्स सोच रहे हैं कि फिटमेंट फैक्टर उम्मीद से ज्यादा बढ़ जाएगा, तो इन उम्मीदों को काबू में रखना पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले फिसकल बर्डन को देखते हुए सरकार 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर को 7वें वेतन आयोग के लेवल यानी 2.57 पर या इसके आसपास ही फिक्स कर सकती है.

कई कर्मचारी संगठनों और यूनियन लगातार मांग कर रहे हैं कि महंगाई को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.86, 3.0 या फिर 3.83 तक किया जाए. ऐसे में अगर कर्मचारियों की मांग मान ली जाती, तो मिनिमम बेसिक सैलरी सीधे 18,000 रुपये से बढ़कर 40,000 से 50,000 रुपये के पार चली जाती. लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. ये दूसरा पहलू सरकार की फाइनेंशियल कंडीशन है. मिडिल ईस्ट में चले इस टेंशन ने देश के बजट पर बहुत असर डाला है. कच्चे तेल के बढ़े दामों का असर जनता पर ज्यादा ना पड़े, रुपया स्थिर रहे, इसके लिए सरकार और आरबीआई ने कड़े फैसले लिए. देश की विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा देश के खजाने पर पहले से ही कई तरह की योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का भार है.

7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था, जिससे मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 17,990 रुपये हो गई थी. इस बदलाव की वजह से वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार का रेवेन्यू एक्सपेंडिचर पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 4.8% से बढ़कर 9.9% हो गया था. ऐसे में अगर इस बार 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर को ज्यादा बढ़ाया गया, तो राजकोषीय घाटा आउट ऑफ कंट्रोल हो सकता है.

एक्सपर्ट का कहना है कि भले ही फिटमेंट फैक्टर को कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुसार बहुत ज्यादा ना बढ़ाया जाए, लेकिन इसे 7वें वेतन आयोग यानी 2.57 के आसपास रखने पर भी कर्मचारियों की जेब खाली नहीं रहेगी. अभी के समय में महंगाई भत्ते का बेसिक सैलरी में मर्जर और दूसरे भत्तों को मिलाकर, जब 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू होगा, तब भी कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर 26,000 रुपये के बीच सेट हो सकती है. दूसरी तरफ अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के हिसाब से ऑफिसर्स और कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में अच्छी खासी ग्रोथ देखी जा सकती है.

फिटमेंट फैक्टर को समान रखने के फैसले का असर अभी के 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि लाखों पेंशनभोगियों पर रहेगा. सरकार एक ऐसा बीच का रास्ता निकालना चाहती है, जिससे कर्मचारियों की परचेसिंग पावर भी बनी रहे, महंगाई का असर भी कम हो और देश के बजट का बैलेंस भी ना बिगड़े.

आसान भाषा में समझें तो फिटमेंट फैक्टर वो फॉर्मूला या नंबर है, जिससे गुणा करके कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी की जगह नई बेसिक पे बनाई जाती है. इसी फैक्टर के बेस पर कर्मचारियों के हाथों में आने वाली सैलरी फिक्स होती है. ऐसे में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के प्रोसेस पर देश भर की नजरें टिकी हुई हैं और आने वाले हफ्तों में इस पर सरकार की तरफ से कुछ बड़े ऐलान देखने को मिल सकते हैं.