ये है दुनिया की सबसे खतरनाक बकरी, एक ही टक्कर में ले जाएंगे ‘यमराज’

आप सोच रहे होंगे कि बकरी क्या खतरनाक हो सकती है? लेकिन मध्य एशिया की पहाड़ियों में एक ऐसी बकरी रहती है जिससे बड़े-बड़े शिकारी भी कांपते हैं. इसका नाम है मारखोर. इसे “स्नेक ईटर” या “पहाड़ों का राजा” भी कहा जाता है. इसके घुमावदार सींग और चट्टानों पर दौड़ने की क्षमता इसे दुनिया की सबसे अनोखी और खतरनाक बकरियों में शुमार करती है. मारखोर मुख्य रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, भारत और उज्बेकिस्तान की ऊंची पहाड़ियों में पाया जाता है. यह 600 से 3600 मीटर की ऊंचाई तक रह सकता है. जिन खड़ी पहाड़ियों पर दूसरे जानवर फिसलकर गिर जाते हैं, वहां मारखोर आराम से भागता-दौड़ता है. इसके खुर खास तरह के होते हैं जो चट्टानों पर मजबूत पकड़ बनाते हैं. यह खड़ी दीवारों, संकरी लेज पर दौड़ सकता है और यहां तक कि पेड़ों पर भी चढ़ जाता है.

मारखोर के नर के सींग 160 सेंटीमीटर (लगभग 5 फीट) तक लंबे हो सकते हैं. ये घुमावदार, कॉर्कस्क्रू की तरह होते हैं. ये सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बल्कि हथियार भी हैं. मादा-मादा या क्षेत्र के लिए लड़ाई में ये सींग घातक साबित होते हैं. एक जोरदार टक्कर में दूसरे जानवर के सिर या शरीर पर गहरी चोट लग सकती है. यही वजह है कि स्नो लेपर्ड, वुल्फ और लिंक्स जैसे शिकारी भी वयस्क मारखोर से दूर रहते हैं.

मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पशु है. इसकी आबादी पहले काफी कम हो गई थी, लेकिन संरक्षण प्रयासों से अब यह IUCN की नियर थ्रेटेंड श्रेणी में है. सर्दियों में ये ऊंची चोटियों पर चढ़ जाता है और गर्मियों में जंगलों में उतर आता है. जब कोई खतरा महसूस होता है तो मारखोर अपनी अद्भुत चढ़ाई क्षमता का इस्तेमाल करता है. वो ऐसी जगहों पर चला जाता है जहां कोई पीछा नहीं कर सकता. यह खड़े पैरों पर खड़ा होकर ऊंची शाखाओं से पत्तियां खा सकता है. सर्दियों में भोजन की कमी होने पर भी यह पेड़ों की छाल तक खा लेता है.

नर मारखोर का वजन 110 किलो तक हो सकता है. वहीं इसकी लंबाई 1.8 मीटर तक हो सकती है. इसके चेहरे पर लंबी दाढ़ी होती है जो इसे राजसी लुक देती है. बाल लंबे और घने होते हैं जो ठंड से बचाते हैं. मादाएं थोड़ी छोटी और हल्के रंग की होती हैं. मारखोर का नाम फारसी भाषा से आया है, जिसका अर्थ “सांप खाने वाला” होता है. लोककथाओं में कहा जाता है कि यह सांपों का शिकार करता है. इसके सींगों की वजह से शिकारियों का निशाना बनता रहा है जिससे इसकी आबादी घट गई. मारखोर ऊंची चट्टानों पर इतनी तेजी से दौड़ता है कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं. यह पत्ते खाकर अपनी जरूरत पूरी करता है और पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.