कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पहला जत्था रवाना, 17500 फीट ऊंचे लिपुलेख दर्रे से चढ़ाई शुरू

कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 का पहले दल ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपुलेख दर्रे के रास्ते तिब्बत चीन में प्रवेश किया है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के अधिकारियों ने सभी आवश्यक इमीग्रेशन एवं सीमा संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यात्रा दल को तिब्बत चीन की सीमा पर तैनात अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया. पहले दल में 48 श्रद्धालुओं के साथ एक चिकित्साकर्मी और तीन किचन स्टाफ सहित कुल 52 सदस्य शामिल हैं. तिब्बत चीन में प्रवेश के बाद यह दल निर्धारित पड़ावों पर रुकते हुए आगामी दिनों में पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा पूरी करेगा.

दरअसल, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सबसे पुराना यात्रा मार्ग उत्तराखंड के लिपुलेख से है. इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम के नाथुला दर्रे से भी यात्री जाते हैं. वहीं नेपाल के काठमांडू के रास्ते भी यात्रा के लिए श्रद्धालु जाते हैं. पहले उत्तराखंड के गूंजी से श्रद्धालुओं को पैदल होते ही लिपुलेख से होते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाना होता था लेकिन सड़क बनने के बाद अब यात्री सीधे लिपुलेख दर्रे से होते हुए भारत तिब्बत चीन सीमा तक जाते हैं.

उत्तराखंड में अगर कैलाश मानसरोवर यात्रा के जाने का रूट की बात करें तो उत्तराखंड पिथौरागढ़ जिले से धारचूला, धारचूला से तवागढ़ ,तवाघाट से गूंजी, गूंजी से नाभीढांग, नाभीढांग से लिपुलेख दर्रा होते हुए श्रद्धालु तिब्बत चीन की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं. यहां से श्रद्धालु तकलाकोट से होते हुए मानसरोवर झील और उसके बाद कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने जाते हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समन्वय में आयोजित की जा रही है.लिपुलेख मार्ग से यात्रा के लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके. यात्रा में जाने वाले भक्तों में उत्साह दिख रहा है.