बहुरूपिया गांव! शादी से पहले चढ़ती है चीनी वाली रोटी

बिहार एक ऐसा प्रदेश है, जहां गांवों की संख्या काफी अधिक है. इनमें से कुछ गांव ऐसे हैं जो अपने खास और अनोखे रिवाजों के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक अनोखा गांव है ‘बहुरूपिया’. जो पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली प्रखंड के अंतर्गत आता है. इस गांव की सबसे बड़ी विशेषता यहां का एक बेहद दिलचस्प रिवाज है. दरअसल, इस गांव में होने वाले हर धार्मिक कार्य या शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों से पहले ‘बहुरूपी बाबा’ की पूजा की जाती है. जिसका पालन पूरा गांव बेहद श्रद्धा के साथ करता है. अब यह इस गांव की एक अटूट परंपरा बन चुकी है. चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, गांव का हर व्यक्ति इस अनूठी परंपरा को पूरी शिद्दत से निभाता है.

बहुरूपी बाबा से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प कहानी है. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने अपने पूर्वजों से सुना है कि बहुरूपी बाबा मूल रूप से एक कुशल कलाकार थे. जब बेतिया के अंतिम महाराजा जीवित थे. तब वे गांव-गांव घूमकर अपनी कला का प्रदर्शन करते थे. वे अक्सर भगवान शंकर या हनुमान जी का रूप धारण कर खेल दिखाया करते थे, जिससे उन्हें उस दौर में काफी प्रसिद्धि मिली. धीरे-धीरे लोग उन्हें ‘बहुरूपिया’ के नाम से ही पुकारने लगे.

कहा जाता है कि एक दिन अचानक उन्होंने गांव के ही एक स्थान पर जीवित समाधि ले ली. चूंकि बहुरूपी बाबा अपने पूरे जीवनकाल में विभिन्न देवी-देवताओं का रूप धारण कर लोगों का मनोरंजन करते रहे और अंत में उन्होंने जीवित समाधि ले ली, तो ग्रामीणों ने इसे ईश्वर का चमत्कार समझा. ग्रामीणों के अनुसार, इस चमत्कारी घटना के बाद उनके पूर्वज उस समाधि स्थल पर जाकर मन्नतें मांगने लगे. अपने दुख-दर्द साझा करने लगे. जब लोगों की मनोकामनाएं सच में पूरी होने लगीं और उन्हें लाभ मिला. तो ग्रामीणों ने उन्हें भगवान का रूप मान लिया और ‘बहुरूपी बाबा’ कहकर संबोधित करने लगे. इसके बाद ही इस गांव का नाम भी ‘बहुरूपिया’ पड़ गया.

उसी दौर से यह अटूट रिवाज बन गया कि गांव में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या शादी-विवाह से पहले बहुरूपी बाबा की पूजा की जाए. उन्हें विशेष चढ़ावा चढ़ाया जाए. ग्रामीणों के मुताबिक, बहुरूपी बाबा को भोग के रूप में चावल की बनी रोटी और चीनी भरकर बनाई गई रोटी चढ़ाई जाती है. आज भी पूरा बहुरूपिया गांव आपसी भाईचारे के साथ इस अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा को निभा रहा है.