चीन ने खोज निकाला ऐसा चावल, जिसे जीवन में सिर्फ एक बार खरीदना पड़ेगा बीज
दुनियाभर के किसानों के लिए हाइब्रिड चावल की खेती करना हमेशा से काफी खर्चीला सौदा रहा है. हाइब्रिड किस्मों से सामान्य चावल के मुकाबले 10 से 30 प्रतिशत ज्यादा उपज तो मिलती है, लेकिन इसके बीज हर साल बाजार से महंगे दामों पर खरीदने पड़ते हैं. अगर किसान अपनी ही फसल के बचे हुए बीज दोबारा बोते हैं, तो उनकी पैदावार काफी गिर जाती है. लेकिन चीन के चाइना नेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस दशकों पुरानी समस्या का तोड़ खोज निकाला है. उन्होंने ऐसी ‘सेल्फ-क्लोनिंग’ तकनीक विकसित की है जिससे बीज हर पीढ़ी में अपनी ज्यादा पैदावार की खूबी को बरकरार रखेगा.
प्रोफेसर वांग केजियान के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने चावल के अंदर ही पाए जाने वाले प्राकृतिक जीन ‘HUAXU’ का इस्तेमाल किया है. यह जीन पौधे के अंडकोष में बिना नर-परागण के ही भ्रूण बनाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. इस प्राकृतिक क्लोनिंग प्रक्रिया को सिंथेटिक एपोमिक्सिस (Synthetic apomixis) कहा जाता है. वैज्ञानिकों ने इस तकनीक से जो नई राइस लाइन बनाई है, उसे ‘Fix8’ नाम दिया गया है.
इससे पहले वर्ष 2017 में जब इस तकनीक का परीक्षण किया गया था, तब केवल 5 प्रतिशत सफलता मिली थी. बाद में अन्य अंतरराष्ट्रीय शोध समूहों ने इसे 95 प्रतिशत तक पहुंचाया. लेकिन वांग की टीम ने अब 99 प्रतिशत से अधिक क्लोनिंग एफिशिएंसी हासिल कर ली है. इसका सीधा मतलब यह है कि किसान अपनी ही फसल से बीज निकालकर दोबारा बो सकते हैं और फसल की क्वालिटी या पैदावार में कोई गिरावट नहीं आएगी.
पारंपरिक तरीकों से हाइब्रिड बीज तैयार करना बहुत मेहनत और खर्च वाला काम है. इसी वजह से हाइब्रिड बीज आम बीजों की तुलना में 10 से 20 गुना तक महंगे बिकते हैं. चीन में जहां हाइब्रिड बीज 20 से 100 युआन प्रति आधा किलो बिकते हैं, वहीं इस नई Fix8 तकनीक से तैयार बीजों की कीमत घटकर सिर्फ 2 से 5 युआन (लगभग 25 से 60 रुपये) रह जाएगी.
फिलहाल चीन के लगभग 50 प्रतिशत खेतों में हाइब्रिड चावल उगाया जाता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा केवल 5 प्रतिशत ही है. महंगे बीजों की वजह से विकासशील और गरीब देश, खासकर अफ्रीकी देश, इसे नहीं खरीद पाते थे. अगर वैश्विक स्तर पर हाइब्रिड चावल का रकबा 5 से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाता है, तो पूरी दुनिया में अनाज उत्पादन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी.
चीन अपनी केवल 9 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत आबादी का पेट भरता है. इस नई ‘वन-लाइन हाइब्रिड राइस’ तकनीक से उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और फसलों को जलवायु परिवर्तन तथा चरम मौसम से बचाने के लिए नई जेनेटिक वेराइटी तैयार करने में भी मदद मिलेगी. यह शोध दुनिया भर से भुखमरी खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है.
