बेटी ने प्रयागराज में पिता का पिंडदान किया, सामाजिक परंपरा तोड़कर पूरी की अंतिम इच्छा

बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम नगोई निवासी किसान देवनारायण कौशिक (गौतम) का 20 जुलाई को निधन हो गया था। परिवार में पत्नी सुनीता कौशिक, एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। बड़ी बेटी अंबिकापुर में पढ़ाई करती हैं, जबकि पुत्र अभी छोटा है। ऐसे में दूसरी बेटी आस्था कौशिक ने पिता का पिंडदान करने का निर्णय लिया।
सरस्वती शिशु मंदिर, तखतपुर की कक्षा नौवीं की छात्रा आस्था कौशिक ने प्रयागराज में विधि-विधान से पिता का पिंडदान कर उनकी अंतिम इच्छा पूरी की। आस्था ने बताया कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि उनकी बेटियां ही उनका सबसे बड़ा सहारा हैं और उनका पिंडदान भी बेटी ही करेगी।

पिंडदान के दौरान प्रयागराज में कुछ पुरोहितों ने आपत्ति जताई। समाज और कुछ रिश्तेदारों ने भी इस फैसले की आलोचना की। इसके बावजूद आस्था अपने निर्णय पर अडिग रहीं और पूरे विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया।

आस्था ने बताया कि उनके फूफा, बुआ, मामा, चाचा और विशेष रूप से फौजी चाचा मनोज कौशिक ने उनका पूरा साथ दिया। चाचा के हौसले और परिवार के समर्थन ने उन्हें सामाजिक विरोध के बीच भी मजबूत बनाए रखा।

आस्था का कहना है कि जब बेटियां माता-पिता की सेवा कर सकती हैं तो अंतिम संस्कार और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्तव्य भी निभा सकती हैं। उनका मानना है कि समय के साथ धार्मिक परंपराओं में सकारात्मक बदलाव होना चाहिए।

आस्था के अनुसार, उनके पिता देवनारायण कौशिक ने कभी बेटा और बेटी में फर्क नहीं किया। पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान करना उनके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी।

आस्था ने प्रयागराज में अस्थि पूजन के नाम पर होने वाली अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांवों के पुरोहित भी विधि-विधान से यह कार्य करा सकते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

आस्था का दावा है कि श्रेष्ठी कुर्मी समाज में अब तक किसी बेटी द्वारा पिता का पिंडदान करने की जानकारी उन्हें नहीं है। यही वजह है कि उनके फैसले का विरोध भी हुआ। हालांकि उनका कहना है कि यदि उनके इस कदम से समाज में बेटियों के प्रति सोच बदलेगी, तो यही उनके पिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।