तुर्की में पानी के नीचे ‘अजूबा’, दिखा 2400 साल पहले डूबा प्राचीन शहर
पानी के नीचे की दुनिया ने एक बार फिर वैज्ञानिकों को हैरान किया है। इस हैरानी की वजह एक नई खोज है। यह खोज तुर्की के दक्षिण-पूर्व में डिकले बांध के जलाशय वाले हिस्से में पानी के नीचे की गई है। एक्सपर्ट को यहां सदियों पुराने किसी एक डूबे हुए जहाज के बजाय 2,400 साल पुराने एक प्राचीन शहर के अवशेष मिले हैं। इसकी कई चीजें आज भी जिस तरह से बची हुई हैं, उसने एक्सपर्ट को हैरत में डाल दिया है।
रिपोर्ट कहती है कि यह एक अहम खोज है, जो दुनियाभर में समुद्रों, महासागरों या झीलों के पानी के नीचे छिपे कई रहस्यों को उजागर करती है। डिकले यूनिवर्सिटी की इस स्टडी में घरों-मोहल्लों के साथ-साथ मकबरों, मस्जिदों और धार्मिक स्कूलों के होने का पता चला है, जो सभी पानी के नीचे सदियों से होते हुए भी अच्छी हालत में सुरक्षित हैं।
डिकले बांध बनने के बाद 1990 के दशक के आखिर में यह जलाशय बना था। दशकों तक ये संरचनाएं लोगों की नजर से छिपी रहीं। पानी के शांत होने और इंसानी दखल ना होने की वजह से ये अब तक सामने नहीं आई थीं। भारी बारिश के बाद बांध के एक गेट में तकनीकी खराबी के कारण पानी का स्तर कम हुआ, जिससे ये दिखाई देने लगीं।
रिसर्चर्स ने पानी के नीचे 78 घरों के अवशेषों की पहचान की है, जिससे पता चलता है कि इस इलाके में कभी काफी बड़ी आबादी रहती होगी। टाइग्रिस नदी के किनारे खेती वाले इलाके बताते हैं कि यहां की अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित थी। इस जगह पर मस्जिद और मदरसा जैसी धार्मिक संरचनाएं और कई कब्रिस्तान भी मिले हैं।
बांध बनने से पहले एगिल जिला कई प्राचीन सभ्यताओं का घर था और यह साम्राज्यों और संस्कृतियों का मिलन-स्थल था, जिन्होंने इस इलाके पर अपनी छाप छोड़ी। यह नई खोज साफतौर पर दिखाती है कि सदियों में यह बस्ती कैसे विकसित हुई। कुछ संरचनाएं तो 5वीं सदी ईसा पूर्व (BC) की हैं। फिर भी घाटी के व्यापक इतिहास की तुलना में ये मिले हुए अवशेष अपेक्षाकृत नए हैं।
यह खोज पुरातत्वविदों के लिए चुनौती भी पेश करती है। जल स्तर में उतार-चढ़ाव, तलछट का खिसकना और कटाव से ये खंडहर गायब हो सकते हैं। इन्हें बचाने और रिकॉर्ड रखने के लिए सही कदम उठाना जरूरी है। यिल्दिज ने बताया कि इन अवशेषों पर पानी के नीचे पुरातत्व संबंधी अध्ययन संभव है। उन्होंने इस जगह का नक्शा बनाने और भविष्य के लिए इसे सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
