छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों की कश्मीर में हत्या, आतंकियों ने नाम पूछकर हिंदुओं की पहचान की, फिर गोली मारी
श्रीनगर। आतंकियों ने एक बार फिर कायराना हरकत करते हुए शुक्रवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों को गोली मार दी। हमले में दोनों श्रमिकों की मौत हो गई। वहीं, हमले के बाद भाग निकले आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। हमले की जिम्मेदारी लश्कर के मुखौटा संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने लेते हुए आने वाले दिनों में ऐसे और हमले करने की धमकी दी है।
शुक्रवार रात करीब सवा आठ बजे कुलगाम के केलम क्षेत्र में दो आतंकी एक ईंट भट्ठा-77 पर आ धमके। आतंकियों ने वहां काम करने वाले दो श्रमिकों से पहले कथित तौर पर उनका नाम पूछा और फिर उनपर नजदीक से गोलियां बरसाईं। दोनों श्रमिक वहीं पास ही किराये के मकान में रहते थे।
गोली लगने से दोनों जमीन पर गिर पड़े और उन्हें मरा समझकर आतंकी वहां से भाग निकले। आतंकियों के जाने के बाद खून से लथपथ श्रमिकों को उनके साथियों ने स्थानीय लोगों की मदद से अनंतनाग के मेडिकल कालेज (जीएमसी) अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने घायल श्रमिक (24) दीपक रातरे पुत्र उमा शंकर को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे घायल श्रमिक (28) भूपेंद्र पुत्र दशरथ को भी देर रात मृत घोषित कर दिया गया।
देर रात भूपेंद्र को बेहतर उपचार के लिए श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान (स्किमस) अस्पताल में रेफर कर दिया। दीपक की छाती और भूपेंद्र के पेट में गोलियां लगी हैं। बता दें कि कश्मीर में नौ दिन में यह दूसरा टारगेट हमला है।
इससे पहले आतंकियों ने अनंतनाग के लाल चौक क्षेत्र में 22 जुलाई को श्रीअमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। वहीं, पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद इस वर्ष यह दूसरा बड़ा हमला है।
