चीन का ‘बिजली बम’! अकेला ड्रैगन अब बना रहा दुनिया की सबसे ज्यादा पावर

साल 1985 का वो दौर याद कीजिए जब अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था और बिजली बनाने के मामले में चीन से पूरे छह गुना आगे था. लेकिन पिछले चार दशकों में ड्रैगन ने जो चाल चली है, उसने पूरी दुनिया के शक्ति संतुलन को हिलाकर रख दिया है. साल 2025 के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि चीन अब इतना बड़ा पावर हाउस बन चुका है कि वह अकेले अमेरिका, पूरे यूरोपियन यूनियन और भारत को मिलाकर भी उनसे 13 प्रतिशत ज्यादा बिजली पैदा कर रहा है.

साल 1985 में अमेरिका लगभग 2,657 Terawatt-hours (TWh) बिजली बनाता था जबकि चीन सिर्फ 410 TWh पर अटका था. लेकिन 2025 आते-आते यह तस्वीर पूरी तरह से उलट गई. आवर वर्ल्ड इन डेटा के मुताबिक 2025 में चीन का बिजली उत्पादन 10,583 TWh तक पहुंच गया. दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और भारत तीनों मिलकर भी सिर्फ 9,398 TWh बिजली ही बना पाए. इसका सीधा मतलब यह है कि चीन इन तीनों महाशक्तियों के कुल जोड़ से भी 1,184 TWh ज्यादा बिजली पैदा कर रहा है.

चीन का यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ. तेजी से हुए औद्योगीकरण, शहरों के विकास और आर्थिक बढ़त के कारण चीन ने साल 2011 में ही अमेरिका को पछाड़कर दुनिया के सबसे बड़े बिजली उत्पादक का दर्जा हासिल कर लिया था. 1985 के मुकाबले चीन का बिजली उत्पादन आज 25 गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है, जो इतिहास में किसी भी देश का सबसे तेज विस्तार माना जाता है.

भले ही चीन आज सोलर और विंड पावर में दुनिया का लीडर बन चुका है, लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी आज भी कोयला ही है. आंकड़ों के अनुसार चीन अपनी कुल बिजली का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा आज भी कोयले से ही पैदा करता है. यही वजह है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी चीन का नाम सबसे ऊपर आता है.

कोयले के साथ-साथ चीन ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा में भी अरबों डॉलर का निवेश किया है. चीन के पास 55 से ज्यादा चालू न्यूक्लियर रिएक्टर हैं और दर्जनों पर काम चल रहा है. इसके अलावा चीन के पास 425 GW से ज्यादा सोलर और 376 GW से ज्यादा विंड पावर की स्थापित क्षमता मौजूद है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है.

चीन में बिजली की यह खपत अचानक नहीं बढ़ी है. इसकी सबसे बड़ी वजह वहां का विशाल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है जो पूरी दुनिया के लिए सामान बनाता है. इसके अलावा अब चीन में डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिन्हें चलाने के लिए विशाल मात्रा में बिजली की जरूरत पड़ रही है. चीन ने अपने पूरे देश को हाई-वोल्टेज ग्रिड से जोड़ दिया है जिससे बिजली बिना रुके हर कोने तक पहुंचती है.