‘हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर निकलें’, शर्मिला टैगोर पर भड़कीं कंगना रनौत, ‘वंदे मातरम’ विवाद पर गरमाया माहौल

मशहूर वेटरन एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने हाल ही ‘वंदे मातरम’ पर छिड़े विवाद पर रिएक्ट करते हुए अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंद ही अच्छे हैं और इसके बाकी छंद गाना उन लोगों के लिए मुश्किल है, जो एक ही भगवान को मानते हैं। इस पर अब कंगना रनौत ने रिएक्ट किया है। कंगना ने शर्मिला टैगोर के बयान पर हैरानी जताई और कहा कि उन्हें ‘हिंदू-मुस्लिम वाली सोच’ से बाहर निकल आना चाहिए।

बता दें कि ‘वंदे मातरम’ गीत पर बुरी तरह घमासान मचा हुआ है। इसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच 15 अगस्त को विवाद शुरू हो गया था। BJP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यालय में जब स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया जा रहा था, तो उस दौरान सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर इसे रोकने की कोशिश की थी। इसी विवाद में शर्मिला टैगोर भी कूद पड़ीं, जिस पर कंगना ने पलटवार किया है।

कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शर्मिला टैगोर का ‘वंदे मातरम’ पर बोलते हुए वीडियो शेयर किया, और लिखा, ‘मैं इस बात की तारीफ करती हूं कि शर्मिला जी ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर की हैं, लेकिन एक कलाकार के तौर पर मुझे हैरानी है कि कला या कविता को लेकर उनकी सोच इतनी सीमित और बनावटी कैसे हो सकती है।’

कंगना ने आगे बताया कि किसी भी कविता या गाने में इस्तेमाल किए गए शब्द रूपक होते हैं और कवि मनचाहा असर पैदा करने के लिए तरह-तरह की कल्पनाओं का इस्तेमाल करते हैं। ‘वंदे मातरम’ पर अपने विचार रखते हुए कंगना ने कहा, ‘वंदे मातरम आजादी की लड़ाई की भावना है। बंकिम चंद्र जी देश को अपने भीतर की शक्ति को जगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद ने मशहूर बात कही थी कि उन्हें ऐसे युवा चाहिए, जिनके शरीर लोहे जैसे हों, हड्डियां फौलाद जैसी हों और जिनकी नसों में बिजली जैसी ताकत दौड़ती हो। वो मौसम का हाल नहीं बता रहे थे, बल्कि वो बस आगे बढ़ने के लिए शक्ति की मांग कर रहे थे।’

इसके बाद उन्होंने शर्मिला टैगोर पर निशाना साधते हुए लिखा, ‘कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आओ, भले ही हम एक ही ईश्वर में विश्वास करते हों। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और आपसे कसकर गले मिलना भी पसंद करूंगी, ठीक वैसे ही जैसे आप हमेशा मिलती हैं।’

वहीं, शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम’ पर चल रहे विवाद को लेकर कहा था, ‘मेरा मानना ​​है कि बहुत से धार्मिक लोग ऐसे हैं, जो एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, न कि कई देवताओं में। ‘वंदे मातरम’ में एक छंद ऐसा है जिसमें कई देवताओं का जिक्र है। जो लोग एक ही धर्म को मानते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो शुरुआती दो छंद बहुत अच्छे हैं।’