चीन की बुलेट ट्रेन ने 5 सेकंड में पकड़ी 800 km की रफ्तार, बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
बीजिंग: चीन में एक एक्सपेरिमेंटल बुलेट ट्रेन ने एक्सीलरेशन (तेजी से रफ्तार पकड़ने) का अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस ट्रेन ने पांच सेकंड में जीरो से 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ी है। इससे अल्ट्रा-हाई-स्पीड ट्रांसपोर्टेशन का रास्ता खुल सकता है। चीन की ये कामयाबी अहम है क्यों वह मेग्लेव के जरिए ना सिर्फ भारत की वंदे भारत जैसी ट्रेन से बहुत आगे निकल गया है बल्कि विकसित देशों को भी पछाड़ रहा है
इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी-भरकम मैग्लेव ट्रेन हुबेई प्रांत में डोंगु लेबोरेटरी में एक किमी के टेस्ट-ट्रैक पर सिर्फ 5.3 सेकंड में 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने चीन के मैगलेव ट्रेन के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि कहा है। यह इतनी स्पीड तक पहुंचने वाली पहली मैगलेव ट्रेन है, जो पैसेंजर जेट की क्रूजिंग स्पीड के करीब है।
मैग्लेव (मैग्नेटिक लेविटेशन) ट्रेन जमीन पर चलने वाली एक एडवांस्ड गाड़ी है। मैग्लेव ट्रेनें मैग्नेटिक फोर्स का इस्तेमाल करके पूरी ट्रेन को ट्रैक से थोड़ा ऊपर उठाती है। इससे वह फ्रिक्शन हट जाता है, जो शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट की मदद से गाइडवे के ऊपर तैरती है।
पहिए और पटरी के बीच संपर्क ना होने से घर्षण (फ्रिक्शन) खत्म हो जाता है और ट्रैक के चारों ओर कॉइल से पैदा हुई मैग्नेटिक वेव गाड़ी को बढ़ाती है। इससे तेज रफ्तार बनती है। चीन ने दिखाया कि ट्रेन ना सिर्फ बहुत तेज स्पीड पकड़ती है, बल्कि अपने ब्रेकिंग सिस्टम से कंट्रोल होकर रुकती भी है।
चीन के इस ताजा परीक्षण में जीरो से 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने के बाद ट्रेन करीब 200 मीटर के दायरे में धीरे-धीरे आराम से रुक गई। छह महीने में यह तीसरी बार था, जब एक ही ट्रेन ने कम दूरी की मैग्लेव एक्सेलरेशन का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा था।
1.1 टन की इस ट्रेन का पहला टेस्ट जून 2025 में किया गया था, जब इसने सात सेकंड में 650km प्रति घंटे की स्पीड पकड़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। मैग्लेव ने बाद के टेस्ट में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। ट्रेन ने समय को काफी कम करते हुए 700km प्रति घंटे और 798km प्रति घंटे की स्पीड हासिल की।
चीन और जापान में फिलहाल चल रही मैग्लेव ट्रेनें 320 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलती हैं। दुनिया की सबसे तेज कमर्शियल मैग्लेव ट्रेन चीन में फुक्सिंग रेल 350 कमी प्रति घंटे की टॉप स्पीड पकड़ती है। चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के रिसर्चर अल्ट्रा-हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन बना रहे हैं।
चीनी वैज्ञानिक कम प्रेशर या वैक्यूम ट्यूब के अंदर ट्रेन चलाने के लिए ऐसी ही अल्ट्रा-हाई-स्पीड मैग्लेव टेक्नोलॉजी डेवलप कर रहे हैं। हालांकि इन्हें भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत, पैसेंजर की सुरक्षा और लंबी दूरी पर सटीक ट्रैक बनाना शामिल है।
भारत की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस है। इसके अलावा गतिमान एक्सप्रेस भी सबसे तेज ट्रेल में शामिल है। इन रेलों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा है। इसके अलावा दिल्ली एनसीआर में चलने वाली रैपिड रेल (RRTS) भी 160 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है।
वंदे भारत एक्सप्रेस में अलग से लोकोमोटिव इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) स्व-चालित प्रणाली का उपयोग किया जाता है । यह तीव्र गति से 160 किमी/घंटा तक की रफ्तार पकड़ सकती है। यह शून्य से 100 किमी/घंटा की रफ्तार मात्र 52 सेकंड में हासिल कर सकती है।
