चीन को बलूच‍िस्‍तान के गधे बेचकर मालामाल हो रहा पाकिस्‍तान, दुनियाभर से लाखों गधे क्‍यों मंगा रहा ड्रैगन?

इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान की क‍िस्‍मत खुल गई है और वह चीन को जमकर गधे बेच रहा है। चीन में गधे के मांस और चमड़े की भारी ड‍िमांड है। इसका इस्‍तेमाल खाने और परंपरागत चीनी दवा बनाने के लिए किया जाता है। इसकी वजह से चीन दुनियाभर से बड़े पैमाने पर गधे का आयात कर रहा है। चीन में गधे म‍िलने में दिक्‍कत के बाद अब पाकिस्‍तान बीजिंग के लिए गधे का बड़ा सप्‍लायर बन गया है। चीन इसके अलावा ब्राजील और ऑस्‍ट्रेलिया से भी गधे का आयात करता है। चीन में गधे के मांस का बाजार साल 2023 में करीब 8 अरब डॉलर था।

अमेरिकी कांग्रेस रीसर्च सर्विस की साल 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब 23 से 48 लाख गधे हर साल पूरी दुनिया में मांस और चमड़े के लिए काटे जाते हैं। चीन में कम होती गधों की आबादी के कारण बीजिंग दुनियाभर के बाजार से गधे मंगा रहा है। इसमें ब्राजील, पाकिस्‍तान और ऑस्‍ट्रेलिया शामिल हैं। पाकिस्‍तान में कुल गधों की आबादी 60 लाख है। चीन पाकिस्‍तान के लिए अब गधों को बेचने का बड़ा बाजार बन गया है। चीन में मांस और मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए दवाओं को बनाने में इसका इस्‍तेमाल किया जाता है।

पाकिस्‍तान ने अपने हिंसाग्रसत बलूचिस्‍तान प्रांत में एक व‍िशाल स्‍लाटरहाउस बनाया है जहां से हजारों गधे काटने के बाद चीन भेजे जा रहे हैं। इससे पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था को कमाई का नया स्रोत म‍िल गया है। पाकिस्‍तान मुस्लिम धार्मिक कारणों से गधे का मांस नहीं खाते हैं लेकिन चीन में इसकी भारी मांग है। चीन का Hangeng Group ग्‍वादर के पास एक प्रोसिसिंग प्‍लांट चला रहा है। यहां पर अब हर दिन 800 गधों को काटने की तैयारी है। इससे हर महीने 5 म‍िल‍ियन डॉलर की कमाई हो सकती है। यह चाइना पाकिस्‍तान इकनॉम‍िक कॉर‍िडोर (CPEC) का ह‍िस्‍सा है

चीन में गधे की चमड़ी को उबालकर उसका इस्‍तेमाल दवा बनाने में क‍िया जाता है। इसका इस्‍तेमाल ब्‍लड टॉनिक बनाने में किया जाता है। दावा किया जाता है कि यह अनेम‍िया को रोकने, इम्‍युनिटी को बढ़ाने और नींद को सही करने में कारगर होता है। इसका इस्‍तेमाल कास्‍मेटिक्‍स में भी क‍िया जाता है। चीन में जिलेट‍िन की मांग काफी ज्‍यादा हो गई है। ऐसे में चीन को बड़े पैमाने पर गधे के चमड़े की जरूरत है। चीन में बहुत बड़े पैमाने पर गधे को काटने की वजह से वहां पर इनकी संख्‍या काफी कम हो गई है। इसी वजह से चीन अफ्रीका तक से बात कर रहा है। अब डर यह सता रहा है कि चीन की मांग को देखते हुए अफ्रीका में गधे की संख्‍या में भारी कमी आ सकती है।