समुद्र में मिली 9000 साल पहले डूबी आदिवासियों की बस्ती
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट पर पानी के नीचे मिले पत्थर के औजारों से एक्सपर्ट को अहम जानकारी मिली है। रिसर्च से पता चलता है कि यहां कभी मीठे पानी का कोई झरना था और यह जगह शायद आदिवासी समुदायों के इकट्ठा होने के लिए थी। यह जगह 9,000 साल पहले समुद्र में डूब गई थी। कई एक्सपर्ट का मानना है कि यहां मिली वस्तुएं उससे भी ज्यादा पुरानी हो सकती हैं। ये खोज उत्तर-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मुरुजुगा में हुई हैं। शोधकर्ताओं को पानी के नीचे दो जगहों पर पत्थर की 21 चीजें मिली हैं।
क्वाटरनरी साइंस रिव्यूज में छपी रिपोर्ट के अनुसार, जो जगहें आज समुद्र की सतह से 11 से 15 मीटर नीचे हैं, वे कभी मीठे पानी के झरनों, नदियों और पथरीली पहाड़ियों वाले इलाके का हिस्सा हुआ करती थीं। इस शोध से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया की प्राचीन आदिवासी विरासत आज के समुद्र तट से कहीं आगे तक फैली हुई है। समुद्र में दूर जाने पर शायद और भी पुराने पुरातात्विक साक्ष्य मिल सकते हैं, जिनकी अभी खोज होनी बाकी है।
पिछले हिम युग के दौरान समुद्र का जलस्तर आज की तुलना में काफी नीचे था, जिससे ऑस्ट्रेलिया के तट पर जमीन का बड़ा हिस्सा बाहर था। आदिवासी समुदाय इन इलाकों में आते-जाते थे, मीठे पानी के स्रोतों का इस्तेमाल करते थे और अपने औजार बनाने के लिए पत्थर इकट्ठा करते थे। हिम युग खत्म हुआ और समुद्र का जलस्तर बढ़ा तो जमीन समुद्र में डूब गई और पुरानी नदियां और झरने लहरों के नीचे दब गए।
मुरुजुगा में शोधकर्ताओं ने दो ऐसी जगहों की जांच की, जहां उस पुराने पर्यावरण के निशान मौजूद हैं। पहली जगह WH2 फ्लाइंग फोम पैसेज में पानी के नीचे डूबे एक मीठे पानी के झरने के पास है। गोताखोरों को वहां पत्थर की नौ वस्तु मिलीं। इनमें कुछ ऐसे पत्थरों से बनी चीजें हैं, जो उस इलाके में नहीं पाए जाते।
दूसरी जगह मैटलैंड रिवर हमॉक मैटलैंड नदी के पुराने रास्ते के पास पथरीले टीले पर स्थित है। यहां 12 वस्तु मिलीं, जिनमें पत्थर के टुकड़े हैं, जो औजार बनाने की प्रक्रिया में निकलते हैं। यह दिखाता है कि लोग यहां कच्चा माल लेने और औजार बनाने के लिए आते होंगे। हजारों सालों तक पानी के नीचे रहने के बावजूद पत्थर के इन औजारों पर ऐसे कोई खास निशान नहीं हैं, जिनसे पता चले कि समुद्र की लहरों ने इन्हें बहुत दूर तक बहाया हो।
शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि औजार बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए पत्थर कहां से आए थे। उनके नतीजों से पानी के नीचे मौजूद दो जगहों के बीच अंतर सामने आया। पहली जगह मीठे पानी का झरना है, वहां मिली नौ नई वस्तुओं में से चार ऐसी सामग्री से बनी थीं जो आज के रोजमेरी द्वीप के पास के भूवैज्ञानिक स्रोतों से जुड़ी हैं। इसके उलट मैटलैंड रिवर हमॉक में मिली 12 वस्तु ऐसे पत्थरों से बनी थीं, जो उस जगह के काफी करीब मिल जाते हैं।
पुरातत्वविदों के लिए इन नतीजों से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती मानव इतिहास का कितना हिस्सा अभी भी पानी के नीचे दबा हुआ है। अब तक की जाच-पड़ताल मुख्य रूप से कम गहरे इलाकों तक ही सीमित रही है, जबकि महाद्वीपीय शेल्फ का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनछुआ है।
पिछले हिमयुग के दौरान समुद्र का स्तर आज की तुलना में 130 मीटर नीचे था, जिससे ऑस्ट्रेलिया के महाद्वीपीय शेल्फ का बड़ा हिस्सा जमीन के ऊपर आया था। पानी में डूबे इस इलाके का बड़ा हिस्सा अभी अनखोजा है। भविष्य में पानी के नीचे की जाने वाली खोजों से ऐसी कई पुरातात्विक जगहें सामने आ सकती हैं।
