हीरे जैसा कीमती है ये दुर्लभ पौधा, कहलाता है कलयुग की संजीवनी
भारत में कई पेड़-पौधे अब विलुप्त होने की कगार हैं. ऐसा ही एक दुर्लभ पौधा है जो दस बीमारियों को कंट्रोल करने में सहायक है. इसे कलयुग की संजीवनी कहा जाता है. अंग्रेजी में इसे मैजिक स्लेट ट्री है. माना जाता है कि इस पेड़ की छाल से घाव बहुत तेजी से भरता है. आयुर्वेद-लोक चिकित्सा में लंबे समय से इसका उपयोग किया जाता रहा है. पुराने जमाने में इसकी लकड़ी से कटोरे बनाए जाते हैं. दूध प्राकृतिक तरीके से दही बन जाता है. इसके पत्ते का अर्क बहुत उपयोगी माना जाता है. इसका नाम दहिमन है. यह प्लांट कहां पर पाया जाता है
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दहिमन पेड़ की पत्तियां पलाश से मिलती-जुलती होती हैं. तना मजबूत होता है. इसकी छाल बहुत ही औषधीय होती है. छाल के काढ़े का इस्तेमाल नशा उतारने में होता है. छत्तीसगढ़ के जंगलों में यह पौधा बहुत पाया जाता था लेकिन अब इनकी संख्या सिर्फ 10 ही बताई जाती है. इस पेड़ को लेकर कई नए शोध हो रहे हैं. बताया जाता है कि इसमें एंटी कैसर, एंटी बीपी जैसे कई विशेष गुण हैं. दिल्ली-हिमाचल में भी यह पौधा पाया जाता है. अब इस पौधे के संरक्षण के लिए कई लोग पर्यावरणविद प्रयास कर रहे हैं.
इस दुर्लभ प्लांट के बारे में कहा जाता है कि यह गंभीर बीमारियां को ठीक करने में मदद करता है. विदेश में भी इसकी मांग बढ़ी है. खाटू श्याम मंदिर दिल्ली में भी यह प्लांट लगा हुआ है. इस प्लांट को प्रेसीडेंट हाउस में भी लगवाया गया है. ब्लड प्रेशर, किडनी में सूजन, पीलिया रोग और शराब छुड़वाने के लिए भी इस प्लांट के अर्क का इस्तेमाल होता है. यह प्लां खांसी, कफ, दमा में सहायक माना जाता है. हालांकि इन दावों पर आधुनिक वैज्ञानिक शोध अभी होना बाकी है.
इस पेड़ के पत्ते की एक और खासियत है. इसके पत्तों पर कोई भी संदेश लिखा जा सकता है. यानी लकड़ी की छोटी सी स्टिक से अगर इसमें कुछ लिखा जाता है तो वो वह संदेश के रूप में दिखाई देने लगता है. कहा जाता है कि क्रांतिकारी अपना संदेश इन पत्तों के जरिये दिया करते थे. लड़ाई के समय घाव भरने में भी इसके पत्ते मदद करते हैं.
