सोने से भी महंगा बिकता है इस चिड़िया का घोंसला
आज के दौर में सोना खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं रह गई है. बढ़ती कीमतों के चलते लोग गहने खरीदने से पहले कई बार सोचते हैं. भारत में सोने को कीमती संपत्ति और निवेश का भरोसेमंद विकल्प माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी चिड़िया के बारे में सुना है, जिसका घोंसला भी लाखों रुपये में बिक सकता है. दुनिया में स्विफ्टलेट नाम की एक छोटी-सी चिड़िया पाई जाती है, जिसके घोंसले की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है.
आमतौर पर चिड़ियों को पेड़ों की टहनियों, पत्तियों और सूखी घास से घोंसला बनाते देखा जाता है. लेकिन स्विफ्टलेट इस मामले में बिल्कुल अलग है. यह चिड़िया अपने मुंह से निकलने वाली लार की मदद से घोंसला तैयार करती है. इसकी लार हवा के संपर्क में आकर सूख जाती है और धीरे-धीरे एक मजबूत, कप जैसी संरचना बना लेती है. स्विफ्टलेट अक्सर ऊंची चट्टानों, गुफाओं और अंधेरी जगहों पर अपना घोंसला बनाती है. इसे तैयार करने में कई दिन लग सकते हैं. घोंसले की खास बनावट और खाद्य पदार्थ के रूप में इसकी मांग ने इसे बेहद कीमती बना दिया है.
स्विफ्टलेट के घोंसले का इस्तेमाल खासतौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन में लोकप्रिय बर्ड्स नेस्ट सूप बनाने के लिए किया जाता है. चीन, हांगकांग और सिंगापुर जैसे बाजारों में इसे एक महंगे व्यंजन के तौर पर परोसा जाता है. इसकी गुणवत्ता, शुद्धता और उपलब्धता के आधार पर कीमत अलग-अलग हो सकती है. अच्छी गुणवत्ता वाले घोंसलों का एक किलोग्राम लाखों रुपये तक में बिक सकता है.
परंपरा कहती है इस सूप को सेहत, त्वचा की चमक और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है. इसके घोंसलों में प्रोटीन और कुछ अन्य जैविक घटक पाए जाते हैं. हालांकि, इसके सेवन से मिलने वाले कई बड़े स्वास्थ्य लाभों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं. इसलिए इसे किसी बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है.
स्विफ्टलेट के घोंसलों की ऊंची कीमत ने इनके कारोबार को काफी बढ़ावा दिया है. लेकिन इसी मांग के कारण कई जगहों पर घोंसलों की अत्यधिक कटाई और अवैध कारोबार की समस्या भी सामने आई है. प्रजनन के दौरान घोंसले हटाने से चिड़ियों और उनके बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है. इस समस्या को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं. भारत में भी कुछ क्षेत्रों में स्विफ्टलेट की प्रजातियां मिलती हैं, लेकिन इस कारोबार का बड़ा हिस्सा दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ा है.
