अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन 23% बढ़कर ₹2.31 लाख करोड़, चार साल में सबसे तेज ग्रोथ

अक्टूबर 2026 में सरकार को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से बड़ी कमाई हुई है। कुल जीएसटी कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 22.9 फीसदी बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया है। यह पिछले चार साल से अधिक समय में जीएसटी कलेक्शन की सबसे तेज सालाना बढ़ोतरी है। सरकार की ओर से रविवार, 1 नवंबर को जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।

सितंबर में जीएसटी कलेक्शन की सालाना ग्रोथ 14.7 फीसदी रही थी, जो अक्टूबर में बढ़कर 22.9 फीसदी हो गई। इसके साथ ही लगातार चौथे महीने जीएसटी कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के पार रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में अक्टूबर का कलेक्शन दूसरा सबसे बड़ा मासिक कलेक्शन रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में देश के भीतर सामान और सेवाओं की बिक्री से मिलने वाला जीएसटी 16 फीसदी बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया। वहीं, विदेश से सामान मंगाने यानी आयात पर मिलने वाला जीएसटी 42 फीसदी बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये हो गया।

कुल 2.31 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी कलेक्शन में सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) की हिस्सेदारी 42,935 करोड़ रुपये रही। वहीं, स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) से 51,340 करोड़ रुपये मिले। इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) का कलेक्शन 1.37 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।

अक्टूबर में सरकार ने कारोबारियों को कुल 27,934 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड दिया। यह पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले 6.5 फीसदी ज्यादा है। रिफंड की रकम घटाने के बाद अक्टूबर में नेट जीएसटी कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। इसमें सालाना आधार पर 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

नेट जीएसटी कलेक्शन वह रकम है, जो कारोबारियों को टैक्स रिफंड देने के बाद सरकार के पास बचती है। इसलिए सरकार को टैक्स से वास्तव में कितनी कमाई हुई, यह समझने के लिए नेट कलेक्शन भी महत्वपूर्ण होता है।

मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के पहले सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के बीच कुल जीएसटी कलेक्शन 13.2 फीसदी बढ़कर 14.77 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया है। वहीं, इसी अवधि में रिफंड घटाने के बाद नेट जीएसटी कलेक्शन 13 फीसदी बढ़कर 12.69 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।

जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संकेत मानी जाती है। आम तौर पर जब देश में सामान और सेवाओं की बिक्री बढ़ती है, तो सरकार को मिलने वाला टैक्स भी बढ़ सकता है। हालांकि, कलेक्शन पर कीमतों, टैक्स की दरों और टैक्स जमा करने के तरीके का भी असर पड़ता है।