Dhanteras: आज फंसना नहीं है! सोना खरीदते समय रखें ये ध्यान, डबल फायदे… बरसेंगे पैसे!
पिछले कुछ दिनों में सोना तेजी से सस्ता हुआ है. MCX पर 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 1.41 लाख रुपये है. आज धनतरेस है, और अगर आप सोना खरीदने का मूड बना रहे हैं तो ये फायदे का सौदा जान लीजिए. दरअसल, अधिकतर लोग अभी भी डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) खरीदने से बचते हैं. लोग फिजिकली ज्वेलरी खरीदने ज्यादा पसंद करते हैं. हमारे देश में सोने को निवेश के विकल्प के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में अधिकतर लोग एक गलती कर जाते हैं और बाद में उन्हें फिर पछताना पड़ता है. अगर आप निवेश के लिए गोल्ड ज्वेलरी खरीद रहे हैं तो ये घाटे का सौदा साबित हो सकता है.
बता दें, महिलाओं का ज्यादा जोर ज्वेलरी खरीदने पर होती है. लेकिन उन्हें इस नुकसान के बारे में गहराई से पता नहीं होता है और ज्वेलर भी ग्राहक को इस बारे में नहीं बताता है. ज्वेलर अपने फायदे के लिए हमेशा ग्राहकों को ज्वेलरी खरीदने की सलाह देता है.
ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों को तीन चीजों का भुगतान करना होता है. पहला- ज्वेलरी की कीमत (वजन के हिसाब से), दूसरा- मेकिंग चार्ज (Making Charge) और तीसरा- जीएसटी (3 फीसदी) देना होता है. ज्वेलरी का भुगतान आप ऑनलाइन करें या ऑफलाइन, इसपर आपको केवल 3 फीसदी ही GST का भुगतान करना होता है.
लेकिन अगर आप भी निवेश के नजरिये ज्वेलरी खरीदते हैं तो अब फैसला बदल दीजिए. आपके लिए फायदे का ये सौदा होगा कि आप सोने के सिक्के या गोल्ड बिस्किट खरीदें. सोने का सिक्का 1 ग्राम का भी मिलता है. ज्वेलरी के मुकाबले सिक्के से भविष्य में ज्यादा रिटर्न मिलेगा.
दरअसल, जब आप ज्वेलरी खरीदते हैं और उसमें आपको मेकिंग चार्ज भुगतान करना पड़ता है, आमतौर पर ज्वेलर्स 15 से 20 फीसदी तक मेकिंग चार्ज जोड़ देता है. डिजाइनर ज्वेलरी में ये मेकिंग चार्ज 25 से 30 फीसदी तक लगा दिया जाता है. अब सोचिए अगर आप एक लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदते हैं और उसमें 15 से 20 हजार रुपये तक मेकिंग चार्ज ही होता है.
इसके अलावा अगर उस ज्वेलरी में नग लगा होता है तो उसका वजन भी सोने के साथ जुड़ा होता है, यानी जब आप उस ज्वेलरी को बेचने के लिए जाएंगे तो नग का कोई रिटर्न नहीं मिलेगा. क्योंकि जब भी आप उस ज्वेलरी को बेचना या एक्सचेंज करना चाहेंगे, तो उस समय केवल सोने की कीमत लगाई जाएगी, यानी मेकिंग चार्ज के लिए आपने जो भुगतान किया है तो वो पैसा पानी में चला जाएगा. ऐसे में ज्वेलरी खरीदने से कितना बड़ा नुकसान होता है, यानी ज्वेलरी खरीदने पर ग्राहक को 15 से 20 फीसदी तक का नुकसान तय है.
अब इसका उपाय क्या है? अगर सोना खरीदकर घर में ही रखना है तो फिर गोल्ड क्वाइन यानी सोने के सिक्क खरीदें, क्योंकि इसे खरीदते समय आपको कोई मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता है. आपको केवल 3 फीसदी GST चुकाना होगा, यानी बेचते टाइम मेकिंग चार्ज माइनस करने का कोई झंझट नहीं. जब भी आप गोल्ड क्वाइन या गोल्ड बिस्किट बेचने के लिए जाएंगे, तो पूरा पैसा मिलेगा. फिर ज्वेलरी लेकर क्यों घाटा उठाना.
अगर ज्वेलरी ही खरीदना है तो फिर इन बातों का जरूर ध्यान रखें. क्योंकि अक्सर ज्वेलर ग्राहकों को गुमराह करने के लिए बिल में कई तरह के चार्ज जोड़ देते हैं और ग्राहक जानकारी के अभाव में कुछ नहीं कह पाते. पॉलिस वेट या फिर लेबर चार्ज के नाम पर कुछ रुपये अलग से चार्ज करते हैं, जो नियम के खिलाफ है. आप बिल्कुल इसका भुगतान ना करें और ज्वेलर्स के खिलाफ शिकायत भी कर सकते हैं.
आपको पता होनी चाहिए कि ज्वेलरी 24 कैरेट सोने से नहीं बनती है. बाजार में उपलब्ध अधिकतर ज्वेलरी 22 कैरेट और 18 कैरेट की होती है. इसलिए खरीदते समय इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उस दिन सर्राफा बाजार में सोने का भाव क्या है? जिससे आप सही रेट पर ज्वेलरी खरीद पाएंगे.
सबसे अहम बात यह है कि ज्वेलरी की मेकिंग चार्ज को लेकर मोल-भाव जरूर करें. अधिकतर ज्वेलर मोल-भाव के बाद मेकिंग चार्ज कम कर देते हैं. क्योंकि ज्वेलरी पर 30 फीसदी तक मेकिंग चार्ज लिया जाता है. ज्वेलर्स को सबसे ज्यादा फायदा मेकिंग चार्ज से ही होता है.
हमेशा ऑरिजनल बिल (Original Price) लें. ताकि भविष्य में जब आप उस ज्वैलरी को कहीं भी बेचने जाएं तो उसकी प्योरिटी और वजन को लेकर कोई समस्या न हो. जहां तक शुद्धता की बात है तो केवल और केवल हॉलमार्क ज्वेलरी ही खरीदें.
