अब ‘राम मंदिर प्रसाद’ के नाम पर Amazon ने की ठगी, पैकेट में निकला कुछ और

अयोध्या के राम मंदिर के प्रसाद के नाम पर सामान्य मिठाइयों की ऑनलाइन बिक्री से जुड़ा मामला केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के आदेश तक पहुंचा है। मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने Amazon को ₹1 लाख रूपयों का जुर्माना चुकाने का निर्देश दिया है। दरअसल, यह मामला Confederation of All India Traders (CAIT) की जनवरी 2024 की शिकायत से शुरू हुआ था। मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने माना कि अमेज़न ने ही संबंधित लिस्टिंग को होस्ट, डिस्प्ले और सुगम बनाया, इसलिए केवल मध्यस्थ होने की दलील देकर उपभोक्ता संरक्षण दायित्वों से नहीं बचा जा सकता ।

राम मंदिर के प्रसाद के नाम पर ठगी का मामला क्या है?
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के सामने शिकायत यह थी कि Amazon पर कुछ सामान मिठाइयां ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ नाम से बेची जा रही थीं।
इनके उपयोग और राम जन्मभूमि मंदिर से आशीर्वाद प्राप्त होने का भी दावा किया गया था। आशीर्वाद मिलने जैसे दावे भी किए गए थे।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार चार प्रकार की मिठाइयाँ घी लड्डू, खोया लड्डू, बूंदी के लड्डू और गाय के दूध के पेड़े की लिस्टिंग इस विवाद में शामिल थीं।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन पर ये सारे उत्पाद चंदू ट्रेडिंग कंपनी द्वारा बिहार ब्रदर्स ब्रांड के तहत सूचीबद्ध थे।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ जैसे शब्द सामान्य उपभोक्ता, विशेष रूप से भक्तों को , पूजको को आकर्षित करते हैं, जो स्वाभाविक रूप से यह संकेत करते हैं कि इन्हें अयोध्या के राम मंदिर में भगवान को अर्पित और फिर प्रसाद के रूप में दिया गया हो। प्राधिकरण ने पाया कि संबंधित उत्पाद के पास श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भी ऐसी कोई अनुमति नहीं थी। इसलिए सामान्य मिठाइयों को मंदिर के प्रसाद के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ता को उसकी वास्तविक प्रकृति के बारे में भ्रमित करने वाला माना गया।

दरअसल, यह मामला कानूनी रूप से भ्रामक प्रस्तुति और अनुचित व्यापारिक प्रैक्टिस से जुड़ा है। जनवरी 2024 में CCPA ने भी इसी आधार पर Amazon के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में भ्रामक विज्ञापन की परिभाषा में ऐसी विज्ञापनों को भी शामिल करता है जो किसी उत्पाद की प्रकृति, पदार्थ, मात्रा या गुणवत्ता के बारे में उपभोक्ता को गुमराह करे।
इसके अलावा उपभोक्ता संरक्षण (ई कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 4(3) के तहत ई कॉमर्स इकाई अपने प्लेटफ़ॉर्म पर या व्यवसाय के दौरान अनुचित व्यापार प्रथाएँ नहीं अपना सकती। ऐसा पाए जाने पर दंड का विधान है।
Amazon ने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के सामने कहा कि वह केवल मार्केटप्लेस का मध्यस्थ है और उत्पादों की लिस्टिंग, कीमत, विवरण या वास्तविक बिक्री में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। उसने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के सुरक्षित संरक्षण का हवाला देते हुए कहा कि तीसरे पक्ष के विक्रेता अपनी लिस्टिंग की वैधता के लिए संविदात्मक रूप से जिम्मेदार थे।
लेकिन केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने यह दलील स्वीकार नहीं की। प्राधिकरण ने कहा कि आईटी अधिनियम का मध्यस्थ ढांचा और उपभोक्ता संरक्षण (ई कॉमर्स) नियम अलग अलग अलग कानूनी क्षेत्रों में काम करते हैंं।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने अमेज़न पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया और इसे 15 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही अमेज़न को ऐसे उत्पादों की लिस्टिंग रोकने के लिए कहा गया। है जो प्रसाद, प्रसादम्, महाप्रसाद, भोग या इसी तरह के धार्मिक भेंट होने का दावा कर रहे हों। गौरतलब है कि मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने निर्देशों के दायरे को केवल राम मंदिर तक सीमित नहीं रखा। आदेश में 10 धार्मिक संस्थानों से संबंधित नाम शामिल हैं, जिनमें राम जन्मभूमि मंदिर, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम, माता वैष्णो देवी श्राइन, काशी विश्वनाथ मंदिर और जगन्नाथ मंदिर शामिल हैं। Amazon को कीवर्ड आधारित निगरानी और हटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कहा गया और चेतावनी दी गई कि भविष्य में इसी तरह का उल्लंघन होने पर और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।