2 साल पहले खोया 24 हजार से भरा बैग, ईमानदार कंडक्टर ने ऐसे लौटाया

प्रतीकात्मक चित्र

पब्लिक बस में सफर के दौरान अगर कोई जरूरी सामान या पैसे छूट जाएं, तो ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि अब वह सामान शायद कभी वापस नहीं मिलेगा, लेकिन महाराष्ट्र में एक बस कंडक्टर की ईमानदारी ने इस सोच को गलत साबित कर दिया. उन्होंने न सिर्फ दो साल तक एक बुजुर्ग महिला का खोया हुआ सामान संभालकर रखा, बल्कि लगातार उसकी असली मालिक की तलाश भी करते रहे. आखिरकार किस्मत ने दोनों को फिर उसी बस रूट पर मिला दिया और महिला को उसका खोया हुआ बैग वापस मिल गया.

यह मामला कसाबाई गायकवाड़ का है, जो साल 2024 में छत्रपति संभाजीनगर से वाशिम के बीच बस से सफर कर रही थीं. सफर के दौरान उनका एक बैग बस में ही छूट गया. इस बैग में करीब 24 हजार रुपये थे. इसके अलावा उसमें उनके कुछ जरूरी मेडिकल दस्तावेज भी रखे हुए थे. बस से उतरने के बाद जब उन्हें अपने बैग के बारे में पता चला, तब तक काफी देर हो चुकी थी.

गायकवाड़ ने मान लिया कि उनका पैसा और जरूरी कागजात अब शायद कभी वापस नहीं मिलेंगे. उन्हें क्या पता था कि उनका बैग किसी ऐसे शख्स के हाथ लगा है, जो उसे लौटाने के लिए पूरी ईमानदारी से कोशिश कर रहा है. बस के कंडक्टर राजू वाणी को वह बैग मिला था. बैग मिलने के बाद उन्होंने उसे अपने पास रखने के बजाय तुरंत वाशिम बस डिपो में जमा करा दिया. लेकिन उनकी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं हुई. वाणी लगातार उस महिला की तलाश करते रहे, जिसकी चीजें उनके हाथ लगी थीं.

करीब दो साल तक उन्होंने बैग के सही मालिक को ढूंढने की कोशिश जारी रखी. इतने लंबे समय के बाद शायद किसी और ने उम्मीद छोड़ दी होती, लेकिन वाणी ने ऐसा नहीं किया. वह लगातार इस इंतजार में थे कि किसी दिन उस बैग की मालकिन तक सामान पहुंचाया जा सके. फिर एक दिन अचानक ऐसा मौका आया, जिसकी शायद दोनों ने कल्पना भी नहीं की थी. गायकवाड़ दोबारा उसी बस रूट पर सफर कर रही थीं और संयोग से उस बस में कंडक्टर राजू वाणी ही ड्यूटी पर थे. जैसे ही वाणी ने उन्हें पहचाना, दो साल से संभालकर रखा गया सामान आखिरकार अपनी असली मालिक तक पहुंच गया.

अपना खोया हुआ बैग, 24 हजार रुपये और जरूरी दस्तावेज दो साल बाद वापस पाकर गायकवाड़ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने राजू वाणी की ईमानदारी और लगातार की गई कोशिशों की जमकर तारीफ की. गायकवाड़ ने उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर उन्हें सम्मान के तौर पर 1,100 रुपये भी दिए. यह कहानी सिर्फ खोए हुए पैसे वापस मिलने की नहीं है, बल्कि यह याद दिलाती है कि आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके लिए किसी और की चीज को सेफ उसके मालिक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.