Bank Strike: 11 सितंबर को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, ATM-UPI और ब्रांच पर क्या होगा असर

देशभर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 11 सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने का फैसला बरकरार रखा है. सरकार और बैंक यूनियनों के बीच हड़ताल टालने को लेकर बातचीत हुई, लेकिन इसमें कोई ऐसा फैसला नहीं हो सका जिससे यूनियन्स ने सहमति जताई हो. इसी वजह से अब 11 सितंबर की हड़ताल फिलहाल तय मानी जा रही है.

यूनियनों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग एक हफ्ते में बैंकों में पांच दिन का काम (वर्क डेज) लागू करना है. जब तक सरकार इस पर स्पष्ट फैसला या इसे लागू करने की तय डेडलाइन नहीं बताती, तब तक हड़ताल वापस लेने का सवाल नहीं है. ऐसे में हड़ताल के दिन बैंक ब्रांच में सामान्य कामकाज पर असर हो सकता है. हालांकि, डिजिटल बैंकिंग, UPI और ATM जैसी कुछ सर्विसेस आम तौर पर उपलब्ध रह सकती हैं. अगर आप भी बैंक जाने का प्लान बना रहे हैं तो इसके बारे में जानकारी चेक कर लें.

11 सितंबर की बैंक हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बैंक ब्रांच के कामकाज पर पड़ सकता है. कैश जमा, चेक क्लियरेंस, KYC, लोन से जुड़े काम जैसी सर्विसेस में देरी या रुकावट संभव है. हालांकि ATM, UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सामान्य रूप से चालू रहने की उम्मीद है, लेकिन किसी बैंक की सेवा में तकनीकी समस्या या रखरखाव होने पर स्थिति अलग हो सकती है. ग्राहक जरूरी काम पहले निपटा सकते हैं और ATM, CSP, UPI व डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं.

हड़ताल को लेकर बातचीत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के कार्यालय में हुई. इसमें बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA), वित्तीय सेवा विभाग और श्रम अधिकारियों ने हिस्सा लिया. सरकार की ओर से बैंक यूनियनों से हड़ताल टालने की अपील की गई.

सरकार ने 11 से 13 सितंबर के बीच नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन का भी हवाला दिया. हालांकि, यूनियनों ने हड़ताल स्थगित करने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह समेत प्रमुख मांगों पर अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. इसलिए जब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, हड़ताल जारी रहेगी.

बैंक यूनियनों की लंबे समय से मांग है कि बैंकों में भी हफ्ते में पांच दिन काम होना चाहिए. फिलहाल बैंक कर्मचारी कई शनिवार को भी काम करते हैं. यूनियनों का प्रस्ताव है कि सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम के घंटे कुछ बढ़ाए जा सकते हैं, ताकि शनिवार को छुट्टी दी जा सके.
यूनियनों का तर्क है कि इससे बैंकिंग सेवाओं के कुल ग्राहक-समय में बड़ी कमी नहीं आएगी. उनका कहना है कि कई दूसरे वित्तीय संस्थानों में पहले से पांच दिन का कामकाजी सप्ताह लागू है. मार्च 2024 में हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट में भी पांच दिन के सप्ताह का प्रस्ताव शामिल था. इसे सरकार के पास भेजा गया था, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है.

बैंक कर्मचारियों की नाराजगी सिर्फ पांच दिन के कामकाज करने तक सीमित नहीं है. यूनियनें पब्लिक सेक्टर के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (Performance Linked Incentive) यानी PLI व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठा रही हैं. 7 सितंबर को सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की PLI की योजना को फिलहाल रोक दिया था. सरकार ने कहा था कि इस मुद्दे पर वेतन और सेवा शर्तों को लेकर चल रही बातचीत के दौरान चर्चा की जाएगी. इसके बावजूद यूनियनों ने हड़ताल वापस नहीं ली. उनका आरोप है कि मौजूदा PLI व्यवस्था वरिष्ठ अधिकारियों के पक्ष में है और इसमें बदलाव की जरूरत है.

11 सितंबर की हड़ताल को बैंक यूनियनों ने अपने बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया है. अगर मांगों पर समाधान नहीं निकलता है, तो यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का भी ऐलान किया है. इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है.
वहीं, देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने शेयर बाजार को जानकारी दी है कि उसे 11 सितंबर की हड़ताल का नोटिस मिला है. बैंक ने कहा है कि उसने ब्रांच और कार्यालयों में सामान्य कामकाज बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए हैं, लेकिन हड़ताल के कारण बैंकिंग सर्विसेस प्रभावित होने की संभावना कम है.