महिला सुरक्षा में बेंगलुरु-चेन्नई देश के सबसे बेहतर शहर…

महिलाओं की सुरक्षा के मामले में बेंगलुरु और चेन्नई देश के सबसे बेहतर शहर बने हुए हैं। वर्क प्लेस कल्चर कंसल्टिंग फर्म अवतार ग्रुप की रिपोर्ट ‘टॉप सिटीज फॉर वीमेन इन इंडिया (TCWI) के चौथे संस्करण में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में 125 शहरों को महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और करियर ग्रोथ के आधार पर रैंक किया गया है। बेंगलुरु ने 53.29 स्कोर के साथ पहला स्थान पाया है। 2022 से अब तक की पिछली रिपोर्ट्स से तुलना की गई है। शहरों की रैंकिंग सिटी इन्क्लूजन स्कोर (CIS) के आधार पर की गई है, जो अवतार के रिसर्च और सरकारी आंकड़ों से निकाला गया है। TCWI रिपोर्ट एक लॉन्गिट्यूडिनल इन्क्लूजन इंडेक्स पेश करती है, जो यह आकलन करता है कि भारतीय शहर किस हद तक महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और करियर ग्रोथ/कंटिन्यूटी को सक्षम बनाते हैं। साथ ही यह रिपोर्ट रोल मॉडल शहरों और उभरती हुई बेहतरीन प्रैक्टिस की पहचान करती है। संगठनों, नीति-निर्माताओं और शहरी हिस्सेदारों के लिए स्ट्रक्चरल फ्रेमवर्क भी प्रदान करती है।

CIS दो प्रमुख पैमानों पर आधारित है:

सोशल इन्क्लूजन स्कोर (SIS)शहर में रहना कितना आसान हैमहिलाओं की सुरक्षानौकरियों में महिलाओं की भागीदारीमहिलाओं को आगे बढ़ने के मौके (सशक्तिकरण)

इंडस्ट्रियल इन्क्लूजन स्कोर (IIS)महिला-अनुकूल कंपनियों की संख्याऐसे उद्योग जहां महिलाओं के लिए बराबर मौके होंकंपनियों द्वारा महिलाओं को दिए जाने वाले करियर सपोर्ट और सुविधाएं

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

बेंगलुरु ने 53.29 CIS के साथ टॉप पोजिशन बरकरार रखी, क्योंकि यहां करिअर अवसर और इंडस्ट्री सपोर्ट मजबूत है।

चेन्नई दूसरे नंबर पर रहा और सेफ्टी, पब्लिक सर्विस, मोबिलिटी, हेल्थ और एजुकेशन जैसे सोशल फैक्टर्स में आगे रहा।

पुणे, हैदराबाद और मुंबई टॉप-5 में शामिल रहे।

गुरुग्राम ने बड़ी इम्प्रूवमेंट दिखाई और 2024 के मुकाबले रैंकिंग बेहतर की।

दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा इंडस्ट्री के मामले में आगे हैं, लेकिन सेफ्टी, अफॉर्डिविलिटी और मोबिलिटी में पीछे हैं।

तिरुवनंतपुरम, शिमला और तिरुचिरापल्ली सोशल इंक्लूजन में अच्छे हैं, लेकिन बड़े लेवल पर जॉब्स के मौके कम हैं।

मुंबई में जॉब्स और इंडस्ट्री मजबूत हैं, लेकिन रहने की लागत और इंस्फ्रास्क्टरचर बड़ा चैलेंज है।

2025 की ranking में Tier-2 cities की भागीदारी बढ़ी है, जो दिखाता है कि वूमनफेंडली सिटीज अब सिर्फ मेट्रो सिटी तक सीमित नहीं हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *