‘यहां सबसे बड़ा घोटाला हो रहा’, अंडमान-निकोबार दौरे पर राहुल गांधी, द्वीप के विकास को बताया विनाश

भारत सरकार का ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट लंबे समय से चर्चा में है। यह परियोजना आर्थिक विकास और रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सरकार के इस दावे से सहमत नहीं है और उन्होंने इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में निकोबार द्वीप का दौरा किया और इसे लेकर अपना अनुभव सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इलाके में हुए विकास को विनाश बताया।

राहुल ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिया कि मैं आज ग्रेट निकोबार गया। ये मेरे जीवन के सबसे अद्भुत जंगल हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये जंगल पीढ़ियों में विकसित हुए हैं और यहां के लोग भी उतने ही खास हैं। उनके अनुसार, आदिवासी समुदाय और स्थानीय निवासी अपने अधिकारों से वंचित किए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने सरकार के प्रोजेक्ट को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार इसे प्रोजेक्ट कहती है, लेकिन मैंने जो देखा वह लाखों पेड़ों की कटाई है। यह 160 वर्ग किलोमीटर रेनफॉरेस्ट को खत्म करने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह विकास नहीं बल्कि विनाश है, जिसे विकास की भाषा में छुपाया जा रहा है।

राहुल गांधी ने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ग्रेट निकोबार में जो हो रहा है, वह हमारे समय में इस देश के प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और गंभीर अपराधों में से एक है। राहुल ने आगे कहा कि हमे इसे रोकना होगा और इसे रोका जा सकता है, अगर भारत के लोग वह देखने का फैसला करें जो मैंने देखा है। यह पोस्ट शेयर करने से पहले मंगलवार को राहुल ने मंगलवार को निकोबार द्वीप का दौरा किया था और कैम्पबेल बे के राजीव नगर में रहने वाले स्थानीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की थी।

राहुल का कहना है कि इस दौरान उन लोगों ने सरकार के इस 92,000 करोड़ रुपये के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से उनके घर, जीवनशैली और पारंपरिक अधिकारों पर खतरा है। इन लोगों को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि मैं यहां ज्यादा बोलने नहीं आया हूं। मैं आपकी बात सुनने आया हूं और आपको भरोसा दिलाने आया हूं कि हम आपके लिए लड़ेंगे। राहुल गांधी ने रविवार को इस प्रोजेक्ट का विरोध करने वाले एक स्थानीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की थी। केंद्र सरकार का यह 92000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट, एयरपोर्ट और टूरिज्म विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। लेकिन पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इससे जैव विविधता को भारी नुकसान होगा।