बीकानेर : तोलियासर गांव में तालाब से निकलीं ऐसी रहस्यमयी मूर्तियां
राजस्थान के बीकानेर जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां के एक गांव में तालाब की सफाई के दौरान मिट्टी के नीचे दबी हुई कुछ ऐसी प्राचीन मूर्तियां मिली हैं, जिसने पुरातत्वविदों से लेकर आम जनता तक सबको चौंका दिया है. बीकानेर के तोलियासर गांव में हर साल की तरह इस बार भी आगामी मानसून और बरसात के मौसम से पहले तालाब की सफाई और गाद हटाने का अभियान चलाया जा रहा था. इस नियमित सफाई अभियान के दौरान ग्रामीणों के हाथ कुछ ऐसी रहस्यमयी वस्तुएं लगीं, जिसने पूरे क्षेत्र में कौतूहल, उत्सुकता और गहरी चर्चा का माहौल बना दिया है. तालाब के गहरे कीचड़ और गाद को हटाने के दौरान दो अजीबोगरीब और प्राचीन स्वरूप वाली मूर्तियां बरामद हुई हैं, जिन्हें देखकर मौके पर मौजूद सभी ग्रामीण दंग रह गए. वर्तमान में इन दोनों रहस्यमयी मूर्तियों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गांव के प्रसिद्ध भैरव मंदिर में स्थापित करवा दिया गया है, जहां इन्हें देखने के लिए आस-पास के इलाकों से लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
तालाब की सफाई का यह महत्वपूर्ण कार्य प्रशासक प्रतिनिधि गिरधारीसिंह के कुशल नेतृत्व में किया जा रहा था, जिसमें गांव के युवा पूरे उत्साह के साथ श्रमदान कर रहे थे. इसी खुदाई और सफाई प्रक्रिया के दौरान मिट्टी की गहराई से अचानक दो प्राचीन प्रतिमाएं बाहर निकलीं. जब युवाओं ने इन मूर्तियों के बाहरी आकार, बनावट और स्वरूप को ध्यान से देखा, तो उन्हें लगा कि यह स्थानीय राजस्थानी संस्कृति या पारंपरिक भारतीय देवी-देवताओं की मूर्तियों से बिल्कुल अलग हैं. उत्सुकता वश युवाओं ने तुरंत इन मूर्तियों की तस्वीरें अपने मोबाइल कैमरों में कैद कीं और इंटरनेट व गूगल लेंस के माध्यम से इनके बारे में ऐतिहासिक जानकारी जुटाने का प्रयास शुरू किया. प्रारंभिक जांच और इंटरनेट सर्च में जो तथ्य सामने आए, उसने ग्रामीणों के होश उड़ा दिए. गूगल के अनुसार इन मूर्तियों का सीधा संबंध प्राचीन मिस्र (Egypt) की हजारों साल पुरानी सभ्यता से बताया जा रहा है, जिसके बाद से गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है.
ग्रामीणों द्वारा इंटरनेट से जुटाई गई शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, तालाब से मिली दो प्रतिमाओं में से एक मूर्ति प्रसिद्ध ‘स्फिंक्स’ (Sphinx) जैसी दिखाई देती है. प्राचीन मिस्र की पौराणिक कथाओं में स्फिंक्स को सूर्य देवता का एक शक्तिशाली प्रतीक माना जाता था, जो राजाओं की दैवीय शक्ति और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करता था. मिस्र का विश्व प्रसिद्ध ‘द स्फिंक्स ऑफ गीजा’ करीब 4500 वर्ष पुराना है और आज भी पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा रहस्य बना हुआ है. वहीं, तालाब से मिली दूसरी मूर्ति को मिस्र की प्राचीन देवी ‘बेस्टेट’ (Bastet) का स्वरूप माना जा रहा है. प्राचीन मिस्र की सभ्यता में बेस्टेट को बिल्ली के मुख वाली देवी के रूप में पूजा जाता था, जिन्हें प्रजनन, गृह-परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और बुरी ताकतों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता था. बिल्ली के चेहरे वाली इस अनोखी प्रतिमा को देखकर गांव के बुजुर्ग भी अचंभित हैं.
गौरतलब है कि महज दो दिन पहले ही बीकानेर के ही कोलायत क्षेत्र में एक तालाब की खुदाई के दौरान राजस्थान की प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शिलालेख और मूर्ति मिलने की खबर सामने आई थी. लेकिन कोलायत की खोज जहां स्थानीय इतिहास से मेल खाती है, वहीं तोलियासर गांव के तालाब में मिली ये मूर्तियां राजस्थानी संस्कृति और भारतीय इतिहास से पूरी तरह से भिन्न और विदेशी प्रतीत हो रही हैं. ऐसे में अब पूरे प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में यह गंभीर सवाल उठने लगा है कि आखिर मिस्र की सभ्यता से जुड़ी ये रहस्यमयी मूर्तियां रेगिस्तानी इलाके बीकानेर के इस छोटे से गांव के तालाब तक कैसे पहुंचीं? क्या प्राचीन समय में मिस्र और भारत के इस क्षेत्र के बीच कोई अज्ञात व्यापारिक मार्ग या सांस्कृतिक संबंध था, या फिर किसी व्यक्ति ने कुछ दशक पहले इन्हें जानबूझकर इस तालाब में डाल दिया था? फिलहाल इन सभी सवालों के सटीक जवाब किसी के पास नहीं हैं. गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. ग्रामीणों का पुरजोर मानना है कि यदि भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) और इतिहास के विशेषज्ञ इन मूर्तियों की वैज्ञानिक जांच करें, तो बीकानेर के इतिहास का कोई नया और चौंकाने वाला पन्ना सामने आ सकता है.
