खून जैसे लाल पेट और गिद्ध जैसा सिर, आखिर कौन है ये रहस्यमयी ‘ड्रैकुला’ तोता?
दुनिया में कई ऐसे जीव-जंतु हैं जो अपने अनोखे रूप और व्यवहार के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसे ही दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे लोग ड्रैकुला तोता के नाम से जानते हैं. पहली नजर में यह पक्षी किसी हॉरर फिल्म के किरदार जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसकी असली कहानी इसके डरावने रूप से कहीं ज्यादा दिलचस्प है. वैज्ञानिक दुनिया में इस पक्षी को पेस्केट्स पैरट कहा जाता है. इसका शरीर काले और धूसर रंग के पंखों से ढका होता है, जबकि पेट का हिस्सा चमकीले लाल रंग का होता है. सबसे अलग इसकी पहचान इसका सिर है, जो लगभग बिना पंखों के दिखाई देता है. यही कारण है कि इसे देखकर कई लोगों को गिद्ध की याद आ जाती है. इसके अनोखे रंग और रहस्यमयी चेहरे की वजह से इसे ड्रैकुला तोता का नाम दिया गया है. हालांकि नाम से ऐसा लगता है कि इसका संबंध किसी डरावनी कहानी से होगा, लेकिन वास्तव में यह एक सामान्य पक्षी है और खून पीने जैसी कोई आदत इसमें नहीं होती.
इस पक्षी के सिर पर पंख न होने के पीछे प्रकृति का एक रोचक रहस्य छिपा है. यह मुख्य रूप से अंजीर और कुछ विशेष फलों को खाना पसंद करता है. फलों का रस खाते समय सिर गंदा न हो और चिपचिपा पदार्थ पंखों में न फंसे, इसलिए इसके सिर पर पंख नहीं होते. यही कारण है कि इसका सिर गिद्धों की तरह साफ और खुला दिखाई देता है.
ड्रैकुला तोता दुनिया के बड़े तोतों में गिना जाता है. इसकी लंबाई लगभग 50 सेंटीमीटर तक पहुंच सकती है. इसके बावजूद इसे देख पाना आसान नहीं है, क्योंकि यह पापुआ न्यू गिनी के घने और ऊंचे जंगलों में रहता है. यह बेहद शर्मीला पक्षी माना जाता है और इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है.
दुर्भाग्य से यह अनोखा पक्षी आज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. जंगलों की कटाई से इसका प्राकृतिक आवास लगातार कम हो रहा है. वहीं इसके आकर्षक लाल पंखों के कारण अवैध शिकार भी एक बड़ी समस्या बन चुका है. इसी वजह से इसे संरक्षण की जरूरत वाली प्रजातियों में शामिल किया गया है.
विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी जंगलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. फल खाने के बाद यह बीजों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाता है, जिससे नए पेड़-पौधों का विकास होता है. यानी यह सिर्फ एक दुर्लभ पक्षी ही नहीं, बल्कि पूरे वन तंत्र को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यही कारण है कि पर्यावरण प्रेमी इसके संरक्षण पर विशेष जोर दे रहे हैं.
