सहारा रेगिस्तान के बीच ‘खूनी’ झीलें और नीले पानी का जादू, पुराना रहस्य देख वैज्ञानिक भी रह गए दंग!
दुनिया के सबसे बड़े और गर्म रेगिस्तानों में शुमार सहारा रेगिस्तान अपने भीतर कई ऐसे रहस्य समेटे हुए है, जिन्हें देख पाना हर किसी के बस की बात नहीं है. लीबिया के दक्षिण-पश्चिमी फेजान क्षेत्र में स्थित ‘उबारी सैंड सी’ (Ubari Sand Sea) एक ऐसा ही इलाका है, जहां रेत के आसमान छूते टीलों के बीच नीले और कभी-कभी गहरे लाल रंग की झीलें दिखाई देती हैं. ऐसा लगता है मानो वो झीलें खून से भरी हों. यह नजारा किसी काल्पनिक फिल्म जैसा लगता है, लेकिन इसकी वास्तविकता करोड़ों साल पुराने इतिहास और जलवायु परिवर्तन की दर्दनाक कहानी से जुड़ी है.
करीब 2,00,000 साल पहले, यह पूरा इलाका आज जैसा सूखा और बंजर नहीं था. उस समय यहां मूसलाधार बारिश होती थी और नदियां बहती थीं. इन नदियों ने मिलकर ‘मेगाफेजान’ (Lake Megafezzan) नाम की एक विशाल झील का निर्माण किया था, जिसका आकार चेक गणराज्य (Czech Republic) के बराबर यानी लगभग 1,20,000 वर्ग किलोमीटर था. समय के साथ जलवायु बदली और करीब 3,000 से 5,000 साल पहले यह विशाल जल का भंडार भाप बनकर उड़ गया. आज उसी विशाल सागर के अवशेषों के रूप में यहां 20 छोटी झीलें बची हैं, जो ऊंचे टीलों के बीच पानी के धब्बों की तरह चमकती हैं.
इन झीलों में सबसे प्रसिद्ध ‘उम्म अल-मा (Umm al-Maa)’ और ‘गैबरून (Gaberoun)’ हैं. गैबरून झील पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है, जहां पुराने गांव के खंडहरों के पास रुकने और खरीदारी की व्यवस्था भी है. यहां ‘उम्म अल-हिसान (Umm al-H’isan)’ जैसी और भी खूबसूरत झीलें हैं, लेकिन वहां तक पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं है. इन झीलों की सबसे बड़ी विशेषता इनका अत्यधिक खारापन है. चूंकि यहां कोई नई नदी पानी लेकर नहीं आती और चिलचिलाती धूप में पानी लगातार सूखता रहता है, इसलिए इनमें खनिजों की मात्रा समुद्र के पानी से पांच गुना ज्यादा हो गई है. कुछ झीलों में तो विशेष शैवालों के कारण पानी का रंग खून जैसा लाल दिखाई देता है.
हालांकि, ये झीलें 7 से 32 मीटर तक गहरी हैं, लेकिन इन पर सूखने का खतरा मंडरा रहा है. सहारा (Sahara) के नीचे मौजूद पानी के प्राकृतिक स्रोत (Aquifers) सीमित हैं और बढ़ती आबादी इनका तेजी से इस्तेमाल कर रही है. लीबिया सरकार के ‘ग्रेट मैन-मेड रिवर’ प्रोजेक्ट ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पाइपलाइनों के जरिए रेगिस्तान को हरा-भरा बनाने के लिए जमीन के नीचे से पानी निकाला जा रहा है. जानकारों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो अगले 50 से 100 वर्षों में ये ऐतिहासिक और सुंदर झीलें हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएंगी.
