अब रेगिस्तान में भी लहलहाएगी फसल, चीन ने बनाया अनोखा बैक्टेरिया

चीन अपने अनोखे वैज्ञानिक अविष्कारों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. अब उसने एक ऐसा कमाल कर दिखाया है जो रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों की किस्मत बदल सकता है. चीनी वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार का बैक्टेरिया विकसित किया है जो रेगिस्तान की रेत को मात्र 10 महीने में उपजाऊ मिट्टी में बदलने में सक्षम है.
यह बैक्टेरिया मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों को बढ़ावा देता है, पानी को रोकने की क्षमता बढ़ाता है और पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है. प्रयोगशाला टेस्ट में वैज्ञानिकों ने रेतीली मिट्टी पर इस बैक्टेरिया का छिड़काव किया. नतीजा यह रहा कि 10 महीने के अंदर ही मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में ह्यूमस बन गया और उसमें फसल उगाने लायक हो गई. यह खबर उन देशों के लिए बड़ी उम्मीद है जहां बड़े-बड़े रेगिस्तान हैं.

भारत में थार रेगिस्तान, अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान, मध्य पूर्व के रेगिस्तानी इलाके और चीन के खुद के गोबी रेगिस्तान में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर यह बैक्टेरिया बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया तो लाखों हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया जा सकता है. चीन के शोधकर्ताओं ने बताया कि यह बैक्टेरिया प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों से प्रेरित है. उन्होंने इसे लैब में और बेहतर बनाया है ताकि यह तेजी से काम कर सके. बैक्टेरिया मिट्टी के कणों को एक साथ जोड़ता है, नमी को बनाए रखता है और सूक्ष्म पोषक तत्वों को बढ़ाता है. इससे पौधों की जड़ें आसानी से फैल पाती हैं. पहले रेगिस्तानी इलाकों में खेती के लिए भारी मात्रा में पानी और खाद की जरूरत पड़ती थी. लेकिन इस नए बैक्टेरिया से पानी की खपत भी कम हो जाएगी. वैज्ञानिकों ने कहा कि यह तकनीक जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मददगार साबित होगी क्योंकि ज्यादा पेड़-पौधे लगाने से कार्बन डाइऑक्साइड कम होगा.

भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने भी इस अविष्कार पर नजर रखी हुई है. अगर भारत इस तकनीक को अपनाता है तो थार रेगिस्तान के बड़े हिस्से को हरियाली से भर दिया जा सकता है. इससे ना सिर्फ खाद्य सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण भी सुधरेगा. चीन के इस प्रयोग में इस्तेमाल किए गए बैक्टेरिया को अभी और परखा जा रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले इसके पर्यावरणीय प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा. लेकिन शुरुआती नतीजे बेहद आशाजनक हैं. यह अविष्कार उन लाखों किसानों के लिए नई उम्मीद है जो बंजर जमीन के कारण परेशान हैं. अब रेगिस्तान में भी गेहूं, बाजरा, सब्जियां और फल उगाए जा सकेंगे. चीन ने पहले भी रेगिस्तान को हराने के कई प्रयास किए हैं. वॉल ऑफ चाइना की तरह अब वे रेगिस्तान को हरियाली से घेरने की तैयारी में हैं. वैश्विक स्तर पर जल संकट और मरुस्थलीकरण बढ़ रहा है. ऐसे में चीन का यह बैक्टेरिया दुनिया के लिए वरदान साबित हो सकता है.