‘अमेरिका से डील नहीं, ढील हुई है…’, अखिलेश यादव ने ट्रेड डील पर सरकार को घेरा
लोकसभा में अखिलेश यादव बजट पर बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि शशि थरूर अभी बोल रहे थे. काफी आंकड़े गिनाए, उसी से मिलते-जुलते आंकड़े मेरे पास भी हैं. उन्होंने कहा कि बजट आने से पहले और बजट आने के बाद पूरे देश में अमेरिका से डील को लेकर बात चल रही थी. बीजेपी ने दावे किए कि हमने दुनिया में कई देशों से फ्री ट्रेड डील कर ली है. उनसे जानना चाहूंगा कि कितने देश बचे हैं, जिनसे फ्री ट्रेड डील नहीं कर पाए हैं. कुछ लोग रुपये को लेकर उम्र पर सवाल उठाते थे, इस डील के बाद रुपया कहां जाएगा. यही डील करनी थी, तो पहले ही क्यों नहीं कर ली गई. ये डील नहीं, ढील हुई है. देश जानना चाहता है कि 18 बड़ा है या जीरो. बजट पहले बना या पहले डील हुई.
अखिलेश यादव ने बजट लको दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें गरीब, पिछड़े, दलित के लिए कुछ नहीं है. हम इतने बजट ला रहे हैं, हमारी पर कैपिटा इनकम नहीं बढ पा रही. सरकार को कम से कम फ्री राशन पाने वालों की पर कैपिटा इनकम तो बताना ही चाहिए. यूपी जैसे प्रदेश की डबल इंजन की सरकार को बहुत कुछ कहा जाता है. यूपी के लिए कोई खास योजना ऐसी नहीं आई है, जिससे यूपी के 25 करोड़ लोगों को मुख्य धारा से जोड़ा जाए. यूपी से प्रधानमंत्री आते हैं, भारत सरकार के बजट से कोई भी एक्सप्रेसवे नहीं बना है. जो बने भी हैं, उस क्वालिटी के नहीं हैं, जैसे विकसित भारत की क्वालिटी होनी चाहिए. भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वालों को देखना चाहिए. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से कोई एक्सप्रेसवे बन रहा था. बनने के साथ-साथ उसका नाम भी बदल दिया. पहले चंबल फिर अटल जी के नाम पर… लग रहा वह बस कागजों पर बन रहा था. किसानों की आय दोगुनी करने की बात थी. इस डील के बाद हमारे किसानों का हाल क्या होगा. जब सब कुछ विदेश से ही आएगा, किसान क्या उगाएगा और क्या बेच पाएगा. सरकार ने एग्री इंफ्रा, मंडिया तैयार करने की बात कही थी. किसानों को आज भी एमएसपी की कानूनी गारंटी सरकार नहीं दे पाई. सरकार हर्टिकल्चर क्रॉप्स और दुग्ध उत्पादन के आंकड़े गिनाती है. एमएसपी की गारंटी कब देंगे. अगर किसान को लाभ नहीं मिलेगा, अपवना घर कैसे चलाएगा, बच्चों को कैसे पढ़ाएगा, बेटियों को विदा कैसे करेगा. आज सोने के भाव कहां पहुंच गए. पहले गरीब सोचता था कि बिटिया की विदाई में सोने का कुछ दे देंगे. यही सरकार चलती रही तो चांदी दूर, लोहे पर पीतल का पानी चढ़ाकर भी वह बेटी की विदाई नहीं कर पाएगा.
सरकार उद्योगपतियों के साथ खड़ी है. जो लेबर कोड लाए गए हैं, वह लेबर नहीं उद्योगपतियों के पक्ष में हैं. एयर पॉल्यूशन को लेकर पहले ही कह चुका हूं. शहरी विकास क्योटो को देखा है. स्वास्थ्य और शिक्षा का बजट केवल 10 और 14.2 परसेंट ही बढ़ाया गया है, पिछले साल का पूरा बजट खर्च ही नहीं हो पराया है. सरकार बताए. प्रधानमंत्री ने जो गांव गोद लिया था, उसे अनाथ छोड़ दिया है, हर साल रियल वेजेज दो परसेंट कम हो रही हैं. सरकार बताएगी कि इसके पीछे कारण क्या हैं. मेक इन इंडिया और पीएलआई योजना सफल नहीं हुई और बेरोजगारी बढ़ रही है. ये बजट दिशाहीन है, 2047 तक विकसित भारत नहीं बनेगा, लेकिन गरीबो से अन्याय होगा. एआई और बजट, बीजेपी सबसे ज्यादा खर्च करती है दूसरों को बदनाम करने में.
