उत्तराखंड में मुस्लिम शख्स की दुकान के नाम पर विवाद, बदलवाने पहुंचे हिंदू संगठन के कार्यकर्ता, हुआ बवाल
उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम समुदाय के एक दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद, एक बड़े बवाल में तब्दील होता नजर आ रहा है। हिंदू सगंठन के कार्यकर्ताओं ने कुछ वक्त पहले उसकी दुकान के नाम पर आपत्ति जताते हुए उससे नाम बदलने को कहा था, लेकिन जब उसने नाम नहीं बदला तो शुक्रवार को वे वहां एकबार फिर पहुंचे और उससे नाम हटाने को कहा। हालांकि इसी बीच वहां पर दीपक और विजय रावत नाम के दो हिंदू युवक पहुंच गए और उन्होंने मु्स्लिम दुकानदार बाप-बेटों का बचाव करते हुए हिंदू संगठन के लोगों को वहां भगा दिया था। इसके बाद शनिवार को सैकड़ों की तादाद में हिंदू संगठन के युवा दीपक और विजय को सबक सिखाने के लिए कोटद्वार पहुंच गए, हालांकि पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए उन युवकों को वहां से खदेड़ दिया। लेकिन इस पूरी घटना के बीच दीपक सोशल मीडिया पर स्टार बन गया।
दरअसल यह घटना शुक्रवार को उस वक्त सामने आई थी, जब हिंदू संगठन के कार्यकर्ता पिछले 30 साल से शहर में ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ के नाम से दुकान चला रहे मुस्लिम बाप-बेटों के पास पहुंचे और उनसे अपनी दुकान का नाम बदलने को कहा। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार्यकर्ता कह रहे हैं, कि आपने पहले यह वादा किया था कि जब हम दुकान शिफ्ट करेंगे तो इसका नाम भी बदल लेंगे, लेकिन आपने अबतक अपना वादा नहीं निभाया।
हिंदू संगठन के लोगों का कहना था कि बाबा नाम कोटद्वार में सिद्धबली मंदिर से जुड़ा हुआ है, और इसका मतलब यहां सिद्ध बाबा होता है, ऐसे में उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा अपनी दुकान का नाम बाबा रखने पर आपत्ति जताई और इसी वजह से उन्होंने ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ नाम की इस दुकान पर बैठे पिता-पुत्र से दुकान का नाम बदलने की बात कही। हालांकि बातचीत के दौरान दुकान के संचालक ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि हमने बोर्ड पर दुकान संचालक का नाम शोएब लिखा भी हुआ है, लेकिन फिर भी हिंदू संगठन के लोग उनसे दुकान का नाम बदलने अनुरोध करते रहे।
इसी बीच वहां पर दीपक नाम का युवक आ पहुंचा, जो कि जिम संचालक है और उसने आते ही नाम बदलने के लिए कह रहे लोगों का विरोध करना शुरू कर दिया। उसने कहा कि आप बाबा नाम रखने का विरोध कर रहे हो तो जिन लोगों ने बाबा सुपारी और बाबा स्वीट्स नाम से दुकान खोली है उनका क्या। तब संगठन के लोगों ने कहा कि वो हिंदुओं की दुकानें हैं और बाबा नाम हिंदुओं की पहचान से जुड़ा है, इसलिए मुस्लिमों को अपनी दुकान का नाम अपनी पहचान से रखना चाहिए। इतना सुनकर दीपक भड़क गया और उसने बताया कि ये 30 साल से यहां दुकान चला रहे हैं और तुम्हारे कहने से दुकान का नाम नहीं बदलेंगे। इसके बाद उनके बीच तूतू-मैं-मैं होने लगी, और फिर गाली गलौज भी शुरू हो गई। इसके आगे दीपक ने उन युवकों को वहां से जाने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान जब उन युवकों ने दीपक से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया।
इस घटना के बाद शनिवार को हिंदू संगठन के सैकड़ों युवक दीपक को सबक सिखाने के मकसद से कोटद्वार पहुंचे। हालांकि पुलिस की सुरक्षा के चलते वे लोग उस तक नहीं पहुंच सके। पुलिस ने जैसे-तैसे स्थिति को संभालते हुए हिंदू संगठन के नाराज कार्यकर्ताओं को दीपक तक पहुंचने से रोक दिया। इस दौरान हिंदू संगठन के इन कार्यकर्ताओं ने पहले शहर में जुलूस निकाला और उसके बाद वह उस दीपक नाम के युवक के जिम के बाहर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान बजरंग दल के इन कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दीपक को सबक सिखाने के लिए केवल कोटद्वार ही नहीं बल्कि देहरादून-ऋषिकेश से भी हिंदू संगठन के कार्यकर्ता पहुंचे थे।
मुस्लिम दुकानदारों के पक्ष में आवाज उठाकर दीपक सोशल मीडिया पर हीरो बन गया और लोग कहने लगे कि देश में नफरत के माहौल के बीच ऐसे ही लाखों दीपकों की जरूरत है। लोगों ने दीपक को इंसानियत की मिसाल बताया। लोगों ने कहा कि जब दीपक ने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया तो यह सुनकर नफरत फैलाने वालों के चेहरे का रंग उड़ गया। यह काम बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। बहुसंख्यक समाज की खामोशी की वजह से ही ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हुए हैं। लोगों ने कहा कि यही असली भारत है प्यार, एकता और भाईचारे का देश। यूथ कांग्रेस ने दीपक के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ‘नफ़रत को हराने के लिए भीड़ नहीं चाहिए, बस एक इंसान चाहिए जो सही के साथ खड़ा हो जाए। कोटद्वार में दीपक कुमार ने यही किया, और नफ़रत खुद पीछे हट गई। ऐसे ही लोग आज के भारत की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।’
