DRDO की MPATGM मिसाइल का सफल परीक्षण… फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर करती है काम
भारत की रक्षा तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 11 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के KK रेंज में मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल फ्लाइट टेस्ट किया. यह मिसाइल टॉप अटैक मोड में चलते हुए टारगेट (मूविंग टैंक) को मारने में पूरी तरह सफल रही. यह भारत की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह आधुनिक मुख्य युद्ध टैंकों (Main Battle Tanks) को आसानी से नष्ट कर सकती है. MPATGM एक तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट (Fire & Forget) मिसाइल है. इसका मतलब है कि सैनिक मिसाइल छोड़ने के बाद उसे गाइड नहीं करना पड़ता—मिसाइल खुद ही लक्ष्य को ढूंढकर मारती है. यह मिसाइल बहुत हल्की है, जिसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर उठाकर ले जा सकता है.
मुख्य विशेषताएं
टॉप अटैक मोड: मिसाइल टैंक के ऊपर से (टॉप) हमला करती है, जहां टैंक की सबसे कमजोर जगह होती है (टैंक का ऊपरी हिस्सा पतला होता है).
इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर: दिन और रात दोनों में काम करती है. यह थर्मल इमेजिंग से टारगेट को देखती है.
टैंडम वॉरहेड: दो विस्फोटक हेड्स—पहला टैंक के रिएक्टिव आर्मर को तोड़ता है, दूसरा मुख्य बॉडी को नष्ट करता है. आधुनिक टैंकों को भी हरा सकती है.
ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम: बहुत तेज और सटीक.
उच्च प्रदर्शन साइटिंग सिस्टम: सैनिक को टारगेट साफ दिखाई देता है.
प्रोपल्शन सिस्टम: तेज और दूर तक मार करने में सक्षम.
लॉन्च तरीका: ट्राइपॉड (तीन पैरों वाला स्टैंड) या सैन्य वाहन से लॉन्च की जा सकती है.
DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने इस टेस्ट को अंजाम दिया. टारगेट के रूप में एक थर्मल टारगेट सिस्टम इस्तेमाल किया गया, जिसे जोधपुर की डिफेंस लेबोरेटरी ने बनाया था. यह सिस्टम एक चलते हुए टैंक की तरह दिखता और महसूस होता है. मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में चलते टारगेट को सटीक निशाना लगाकर सफलतापूर्वक नष्ट किया.
रिसर्च सेंटर इमरत (RCI), हैदराबाद – सीकर और गाइडेंस
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), चंडीगढ़ – वॉरहेड टेस्टिंग
हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), पुणे – विस्फोटक सामग्री
इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (IRDE), देहरादून – साइटिंग सिस्टम
उत्पादन पार्टनर: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL).
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, इंडस्ट्री और पार्टनर्स को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी. कमत ने कहा कि यह सफल परीक्षण हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
भारतीय सेना को आधुनिक एंटी-टैंक हथियार मिलेगा, जो दुश्मन के टैंकों (जैसे चीन या पाकिस्तान के) को आसानी से रोक सके. टॉप अटैक क्षमता से टैंक के सबसे मजबूत रिएक्टिव आर्मर को भी पार कर सकती है.
फायर एंड फॉरगेट से सैनिक सुरक्षित रहते हुए हमला कर सकता है. यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है—अब भारत विदेशी मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह सफलता DRDO की लगातार बढ़ती क्षमता को दिखाती है. जल्द ही MPATGM भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा को और मजबूत बनाएगी.
