20 साल की बकरी ‘कटोरी’ की मौत पर किसान ने छपवाए कार्ड, 600 लोगों को कराया 13वीं का भोज

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और बेजुबान जानवरों के प्रति अटूट प्रेम की एक अनूठी और भावुक मिसाल कायम कर दी है. अमूमन शोक सभाएं और तेहरवीं के आयोजन अपनों और परिजनों के जाने पर किए जाते हैं, लेकिन यहां एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी के लिए वो सब किया जो अमूमन सगे परिजनों के देहांत पर किया जाता है. सिरोंज के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी, जिसे पूरा परिवार और गांव प्यार से ‘कटोरी’ उर्फ ‘चमेली’ कहता था, 3 अगस्त को इस दुनिया को अलविदा कह गई. किसान नवल सिंह मालवीय के लिए ‘कटोरी’ महज एक मवेशी या जानवर नहीं थी, बल्कि परिवार की एक सदस्य और औलाद जैसी थी. कटोरी बीते 20 सालों से नवल सिंह के घर का अहम हिस्सा बनी हुई थी.

घर की रानी: वह आम मवेशियों की तरह खूंटे से नहीं बांधी जाती थी, बल्कि बाकायदा घर के अंदर पलंग पर सोती थी और पूरे परिवार के सुख-दुख की साझीदार थी. जब 3 अगस्त को उसकी सांसे थमीं, तो पूरा मालवीय परिवार गमगीन हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला.

नवल सिंह ने अपनी ‘कटोरी’ को अंतिम विदाई देने में कोई कमी नहीं छोड़ी. स्थानीय प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेकर कटोरी का पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के बाद नवल सिंह खुद कटोरी की अस्थियां संचित कर पवित्र गंगा नदी पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन का कर्मकांड पूरा किया. रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों को तेहरवीं में आमंत्रित करने के लिए बाकायदा शोक संदेश के कार्ड छपवाकर बांटे गए.

13 दिनों के शोक के बाद 15 अगस्त को गंगाजली खोलने के साथ तेहरवीं का आयोजन किया गया. नवल सिंह ने अपनी प्यारी कटोरी की आत्मशांति और याद में एक विशाल भोज का आयोजन किया. इस तेहरवीं में रिश्तेदार, दोस्त और गांव के लगभग 600 लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में पहुंचे हर एक व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं और सबने एक बेजुबान के प्रति नवल सिंह के इस असीम समर्पण और प्यार की जमकर तारीफ की.