फर्जीवाड़े का आरोपी फॉरेंसिक डॉक्टर फरार : सिम्स बिलासपुर में दर्जनों पीएम रिपोर्ट अटके
बिलासपुर। सर्पदंश से मौत के फर्जी दस्तावेज के मामले में फरार आरोपी डॉक्टर के चलते सिम्स में 35 से अधिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट लंबित है। पीएम रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण मृतक के परिजन एलआईसी दावा आपत्ति और जमानत के लिए चक्कर काट रहे हैं। खास बात यह है कि सिम्स और पुलिस ने इस मामले में हाथ खड़ा कर दिया है, जिसके बाद से परिजनों को है, जिसके बाद से परिजनों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले 3 माह से सर्पदंश का मामला छाया हुआ है, जिले के सबसे बड़े अस्पताल सिम्स से शुरू हुए मामले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन मामले में कई आरोपी अभी भी फरारी काट रहे हैं। मामले में सिम्स के तत्कालीन फारेंसिक विभाग के डॉक्टर और पीएम एक्सपर्ट डॉ एसएन गोले भी फरार चल रहे हैं। पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही है, लेकिन डॉ गोले के फरार रहने से सिम्स के 35 पीएम प्रकरण लंबित है। इन पीएम रिपोर्ट पर डॉ गोले के ही हस्ताक्षर होने है, लेकिन फरार होने के बाद से अब तक पीएम रिपोर्ट नहीं मिल सकी है।
पुलिस विभाग के अनुसार, ऐसे 35 मामले हैं, जिसमें पीएम रिपोर्ट का इंतजार है। पीएम रिपोर्ट के इंतजार में कई पुलिसिया केस में जमानत अर्जी तक नहीं सुनी जा रही है, वहीं एक्सीडेंटल इंश्योरेंस क्लेम, एलआईसी क्लेम तक अटक चुके हैं। यहीं कारण है कि पीएम रिपोर्ट के लिए परिजन जांजगीर, मुंगेली और जिले के दूर दराज से सिम्स की चौकी और फारेंसिक विभाग के चक्कर काटने को मजबूर है।
बिलासपुर डीन सिम्स डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि, पीएम रिपोर्ट वही डॉक्टर दे सकता है, जिसने मृत बॉडी को देखा है और उसका बिसरा लिया है। डॉ. गोले सिम्स में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। पीएम रिपोर्ट क्यों नहीं मिल रही है। इसकी जानकारी विभाग से ली जाएगी लेकिन किसी अन्य डाक्टरों को पीएम रिपोर्ट देने के लिए नहीं लगाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि डॉ. एसएन गोले कई सालों से सिम्स में पीएम रिपोर्ट जारी करते रहे हैं, उन्होंने जिन मृतकों के शव का पीएम किया है, उसकी रिपोर्ट भी उन्हें ही देनी है। अन्य डाक्टर चाह कर भी रिपोर्ट नहीं दे सकते हैं। डाक्टरों का कहना है कि कानूनी दांव के कारण जिन डॉक्टरों के द्वारा पीएम किया जाता है, उन्हें ही हस्ताक्षरित पीएम रिपोर्ट विभाग और पुलिस को सौंपनी पड़ती है। ऐसा नहीं करने पर डाक्टर के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा का प्रावधान भी है।
सूत्रों के अनुसार साल 2021 में डॉ एसएन गोले शासकीय रघुनाथ जिला अस्पताल अंबिकापुर में संविदा डाक्टर के पद पर काम कर रहे थे। पीएम करने के दौरान डाक्टर गोले ने मृतक के परिजनों से 50 हजार रुपए रिश्वत के तौर पर मांगे थे। परिजनों ने 10 हजार रूपए दिए थे। इस दौरान मामला जमकर उठा था और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के संज्ञान में आने के बाद डॉ. एसएन गोले को बर्खास्त कर दिया था।
