गिलगित-बाल्टिस्तान में बवाल… Gen-Z के साथ सड़क पर लोग, पाकिस्तान में कुछ बड़ा होगा ?
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में एक बार फिर सियासी उबाल देखने को मिल रहा है। कार्यवाहक सरकार के मंत्रिमंडल गठन को लेकर युवा कार्यकर्ता ( Gen-Z), विपक्षी दल और आम लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्यवाहक कैबिनेट में राजनीतिक रूप से संबद्ध व्यक्तियों को शामिल करके आगामी चुनावों की निष्पक्षता को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। जीबी यूथ मूवमेंट के नेतृत्व में गिलगित के चिनारबाग में शुरू हुआ धरना अब घांचे, नगर और शिगार जैसे अन्य जिलों तक फैल चुका है। गिरफ्तारियां, सड़क जाम और विपक्षी नेताओं की तीखी आलोचना के बीच क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। यह विरोध न केवल स्थानीय असंतोष को दर्शाता है, बल्कि PoGB में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कार्यवाहक मंत्रिमंडल में नियुक्त कई व्यक्तियों के पहले से राजनीतिक संबंध रहे हैं या वे पिछली सरकारों में सेवा दे चुके हैं। उनका दावा है कि यह कदम एक तटस्थ अंतरिम व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि ऐसी नियुक्तियां चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाती हैं और चुनाव से पहले हेरफेर का रास्ता खोल सकती हैं। हालांकि बाद में विरोध प्रदर्शन धरने में बदल गया, जिस दौरान चिनारबाग स्थित रिवर रोड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया गया। बाद में पुलिस ने जीबी यूथ मूवमेंट के अध्यक्ष सहित आठ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इन गिरफ्तारियों की कई राजनीतिक दलों ने निंदा की और विपक्षी नेताओं ने हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की।
वहीं, जीबी यूथ मूवमेंट के अध्यक्ष अजफर जमशेद ने चेतावनी दी कि यदि कार्यवाहक सरकार के गठन में परामर्श से युवाओं को बाहर रखा गया तो प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि विरोध केवल गिलगित तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के उन अन्य हिस्सों में भी फैलेगा जहां PoGB के युवा रहते हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) विधानसभा के पूर्व सदस्य सुल्तान अली खान ने अवामी एक्शन कमेटी घांचे के नेता जाकिर हुसैन काजिम और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर मंत्रिमंडल के गठन को अप्रतिनिधि और भेदभावपूर्ण करार देते हुए इसे खारिज कर दिया। काजिम ने चेतावनी दी कि PoGB के सीमावर्ती जिले घांचे को बाहर रखे जाने से निवासियों में गहरी निराशा बढ़ रही है और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने एक ही जिले से कई व्यक्तियों की नियुक्ति और अन्य जिलों को नजरअंदाज करने की निष्पक्षता पर सवाल उठाए तथा तर्क दिया कि ऐसा असंतुलन स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की संभावना के लिए खतरा है।
इस बीचपूर्व मुख्यमंत्री और PML-N PoGB के अध्यक्ष हाफिज उर रहमान ने अपनी पिछली आपत्तियों को दोहराते हुए कहा कि सहमति वाले ढांचे में सभी जिलों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है तथा कार्यवाहक मंत्रिमंडल में राजनीतिक रूप से संबद्ध व्यक्तियों को शामिल करने पर रोक होनी चाहिए।
