अंतरिक्ष यात्रियों के चांद से लाए हरे कांच ने 35 साल बाद पलटी वर्षों पुरानी थ्योरी

वॉशिंगटन: साल 1971 में अपोलो 15 के अंतरिक्ष यात्रियों डेविड स्कॉट और जेम्स इरविन ने चंद्रमा पर कुछ अजीब देखा। ये अजीब चीज ग्रे रंग की सतह पर बिखरे हुए हरे रंग के छोटे-छोटे कण थे। उन्होंने इनके सैंपल इकट्ठा किए और पृथ्वी पर ले आए। तब उनको उन्हें यह नहीं पता था कि ये कण दशकों बाद चंद्रमा के बारे में लंबे समय से चली आ रही एक धारणा को चुनौती देगी। इन टुकड़ों ने अब चांद पर पानी की मौजूदगी पर अहम खुलासा किया है।

ब्राउन यूनिवर्सिटी के अनुसार, हरे रंग के ये कण ज्वालामुखी से निकले कांच के दाने थे। मिशन के 35 साल बाद शोधकर्ताओं को ज्वालामुखी कांच में फंसे पानी के सबूत मिले है। नासा के अनुसार, 2008 में अपोलो सैंपल का अध्ययन कर रहे शोधकर्ताओं ने ज्वालामुखी कांच के छोटे दानों में हाइड्रोजन का पता लगाया। इससे यह सबूत मिला कि जब प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों के दौरान ये दाने बने थे, तब चंद्रमा के अंदर पानी मौजूद था।