इंदौर शहर काजी बोले- गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करें, नमाजियों ने हाथ उठाकर किया समर्थन

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहां सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से ठीक पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर मानने की वकालत की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्वक ईद की नमाज अदा की गई।

गाय को हमसाया कौम के लोग बड़े एहतराम से देखते हैं। मुसलमानों पर ये इलजाम लगता है कि ये काटकर खाते हैं। अभी कुछ टाइम से मांग उठा रही है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। हम मांग करते हैं कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके कटने पर पाबंदी लग जा।

शहर काजी ने पानी बचाने को लेकर भी अपील की। उन्होंने कहा- बारिश के पानी को जमीन में उतारें, ये न सोचें कि सरकारी करेगी, प्रशासन करेगा। ये सब आते-जाते रहते हैं। हमें आपको सोचना होगा।

काजी इशरत अली ने एक और बात दमदारी से कहा- नशा बहुत बड़ी चिंता का विषय है। मुसलमान ही नशा बेच रहा है। इसमें औरतें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा- इंदौर में नशे का मुद्दा सबसे पहले मैंने उठाया है। मैं लगातार उठा रहा हूं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी लगातार इस मुद्दे को काफी प्रमुखता से उठते रहे हैं।

इंदौर की ईद एक और खास वजह से पूरे देश में मिसाल है। यहां 50 से अधिक वर्षों से एक अनोखी परंपरा निभाई जा रही है। ईद के दिन शहर काजी को उनके घर से नमाज स्थल (सदर बाजार ईदगाह) तक लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी एक हिंदू परिवार निभाता है। इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने इस रिवाज को आगे बढ़ाया। जैसे ही शहर काजी अपने घर से बाहर आए। हिंदू परिवार ने फूलों का हार पहनाकर उनका स्वागत किया और ईद की मुबारकबाद दी। इसके बाद उन्हें खास तौर पर सजाई गई बग्घी/कार में ससम्मान ईदगाह लाया गया। बता दें कि पिछली ईद पर काजी साहब को विंटेज कार से लाया गया था।

वहीं सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इंदौर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सभी प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा।