पापा की अस्थियां चोरी…. खाली कलश लेकर बिलासपुर थाने पहुंचे दो मासूम, गुहार सुन सन्न रह गए अफसर

बिलासपुर : सिविल लाइन थाना परिसर में उस वक्त माहौल सन्न रह गया, जब 10 साल का बेटा और 7 साल की मासूम बेटी हाथों में खाली अस्थि कलश लेकर थानेदार के सामने खड़े हो गए. बच्चों के हाथों में न कोई खिलौना था, न कागज, न कोई लिखित आवेदन. बस एक ही बात थी. “साहब, हमारे पापा की अस्थियां चोरी हो गई हैं, वापस दिला दीजिए.” यह दृश्य पुलिसकर्मियों को भी भावुक कर गया. सिविल लाइन थाना पुलिस का कहना है कि मामले की शिकायत दर्ज कर ली गई है. पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, लेकिन इसमें धार्मिक आस्था और कानून दोनों के पहलू जुड़े हुए हैं. जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

यह मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित भारती नगर का है. मृतक का नाम आलोक ठाकरे बताया गया है, जो पेशे से ठेकेदार थे. परिजनों के अनुसार, आलोक और उनकी पत्नी के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था. आरोप है कि आलोक की पत्नी को उसकी ही बहन कथित तौर पर भड़काकर घर से ले जाया गया था. इसके बाद आलोक ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी. कोर्ट ने पत्नी को तलाश कर पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस उसे ढूंढ नहीं सकी.

परिजनों का कहना है कि पत्नी के घर छोड़ने के बाद आलोक मानसिक तनाव में रहने लगे. पारिवारिक कलह, कानूनी लड़ाई और अकेलेपन ने उनकी सेहत पर गहरा असर डाला. कुछ समय बाद आलोक गंभीर रूप से बीमार हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. भारती नगर स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया. परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि एक नया और और भी संवेदनशील विवाद खड़ा हो गया. परिवार का आरोप है कि अंतिम संस्कार के कुछ समय बाद आलोक की पत्नी अचानक घर पहुंची. इस दौरान मोहल्लेवासियों और परिजनों से उसका विवाद हुआ. विवाद के बाद महिला सीधे मुक्तिधाम पहुंची और वहां से आलोक की अस्थियां एक पन्नी में भरकर अपने साथ ले गई. परिजनों का कहना है कि यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है. फुटेज में महिला को अस्थियां ले जाते हुए देखा जा सकता है.

स्थानीय लोगों के अनुसार, मुक्तिधाम में अचानक हुई इस घटना से सभी हैरान रह गए. अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को इस तरह ले जाना न सिर्फ परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि धार्मिक और मानवीय भावनाओं को भी आहत करने वाला है. परिजनों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन आरोप है कि शुरुआती स्तर पर कार्रवाई को लेकर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

 

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