दोराहे पर खड़ी दुनिया, ईरान-US वार्ता फेल… होर्मुज पर अब आगे क्या होगा?

इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई वार्ता का नाकाम होना पश्चिम एशिया में आने वाले सबसे बड़े सामरिक और राजनीतिक तूफान की आहट है. 21 घंटे चली बातचीत के बाद जब दोनों पक्ष बिना किसी समझौते के लौट गए, तो ये साफ हो गया कि अब मामला बातचीत की मेज से निकलकर जंग की मैदान की तरफ बढ़ चला है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप वार्ता विफल होने पर धमकी दे रहे हैं कि अब चारों तरफ से ईरान की घेराबंदी करेंगे और ईरान में जो कुछ बचा है उसे पूरी तरह खत्म कर देंगे. ट्रंप जिद पर अड़ गए हैं कि वो किसी भी सूरत में ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे. दुनिया अब इस बात को लेकर चिंतित है कि आगे क्या होगा, क्योंकि ये टकराव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. तमाम कोशिशों और तमाम उम्मीदों के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल हो गई. सवाल उठता है कि इस वार्ता के नाकाम होने का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? अगर फिर से जंग शुरू होती है तो सैन्य मोर्चे पर हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं, जहां ऑपरेशन और हमले ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं. दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नए गठजोड़ और तनाव उभर सकते हैं जिससे दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है और तीसरा सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जहां तेल की कीमतों से लेकर व्यापार और बाजार तक सब कुछ प्रभावित हो सकता है.

पश्चिम एशिया पहले से ही एक संवेदनशील इलाका है और इस वार्ता के फेल होने के बाद वहां सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं. इस्लामाबाद से खाली हाथ लौटा अमेरिका अब खाड़ी देशों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकता है, अपने नुकसान की भरपाई करने के लिए वो एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल सिस्टम की तैनाती बढ़ सकता है.

वहीं ईरान भी अपने प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए जवाबी रणनीति को तेज कर सकता है. यमन, इराक, सीरिया और लेबनान जैसे देशों में सक्रिय ईरान के प्रॉक्सी गुटों के जरिए युद्ध का दायरा फैलने का खतरा बढ़ जाएगा.

सबसे बड़ा खतरा होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा है. दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है और अगर यहां किसी तरह की सैन्य कार्रवाई होती है तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा. छोटे-छोटे हमले भी बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं. वार्ता विफल होने के बाद अगर हालात बेकाबू हुए तो ये एक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है जिसमें कई देश शामिल हो सकते हैं. पाकिस्तान में शांति वार्ता फेल होने के बाद होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता ही जा रहा है. वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के रुख से साफ लग रहा है कि वो होर्मुज पर कोई बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं. अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज की तरफ रवाना हो रहे हैं और आसमान में अमेरिकी विमानों की दहाड़ बता रही है कि ईरान का बारूदी किला ढहाने के लिए अमेरिका मिडिल ईस्ट में अभी तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू करने जा रहा है.

यानी अब ईरान और अमेरिका में आर-पार की जंग का अलार्म बजने वाला है, लेकिन किसका होर्मुज पर कंट्रोल होगा और किस तरह ईरान ने होर्मुज को अपना एटम बम बना रखा है. होर्मुज नहीं खुला तो मिडिल ईस्ट में फिर आग बरसेगी. एक बार फिर से पश्चिम एशिया की धरती बारूद उगलेगी. ईरान ने होर्मुज में नो एंट्री की चेतावनी दे रखी है तो क्या ईरान ने होर्मुज को अमेरिका के खिलाफ अपना एटम बम बना लिया है.

क्या होर्मुज को लेकर अब अमेरिका ईरान के खिलाफ अब अपना सबसे बड़ा बारूदी कदम उठाएगा? ईरान और अमेरिका की वार्ता फेल हो जाने और होर्मुज नहीं खोलने के बाद ट्रंप का रुख बेहद सख्त हो गया है. एक बार फिर ट्रंप होर्मुज को लेकर भड़क गए हैं. ट्रंप ने अब चेतावनी दी है कि वो ईरान पर बड़े हमले के लिए तैयार हैं और ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे.