ट्रंप की टिप्पणियों पर पोप लियो 14वें का जवाब.. कहा- मैं ट्रंप प्रशासन से नहीं डरता, मेरा काम शांति फैलाना है

पोप लियो 14वें ने सोमवार को राजनीतिक टकराव से दूर रहने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद राजनीति करना नहीं, बल्कि धर्म और शांति का प्रचार करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के साथ उनका टकराव में पड़ने का कोई इरादा नहीं है। अल्जीरिया जाते समय विमान में पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे थे। इसके जवाब में पोप ने कहा, मैं कोई राजनेता नहीं हूं। मेरा डोनाल्ड ट्रंप के साथ बहस करने का कोई इरादा नहीं है। लोग खुद समझदार हैं और वे अपनी राय बना सकते हैं। पोप ने जोर देकर कहा कि वे दुनिया में शांति चाहते हैं और युद्धों को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने निडर होकर कहा, मैं ट्रंप प्रशासन से नहीं डरता। पोप के अनुसार उनका संदेश पूरी तरह से आस्था पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वे केवल ‘गॉस्पेल’ (ईसाई धर्मग्रंथ) की बात करते हैं। उन्होंने कुछ लोगों पर धर्म के संदेश का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। पोप ने कहा कि वे युद्ध के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे और देशों के बीच बातचीत से समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।

पोप लियो 14वें ने अपनी अफ्रीका यात्रा को खुद के लिए और पूरी दुनिया के लिए एक आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि शांति और मेल-मिलाप बहुत जरूरी है। यह उनकी अल्जीरिया की पहली यात्रा है। अल्जीरिया सेंट ऑगस्टीन की जन्मभूमि है, जिन्हें पोप बहुत मानते हैं। पिछले साल मई में चुने जाने के बाद पोप ने खुद को सेंट ऑगस्टीन का बेटा बताया था। अल्जीरिया में 4.8 करोड़ मुस्लिम आबादी के बीच केवल कुछ हजार कैथोलिक ईसाई रहते हैं। पोप की इस 10 दिवसीय यात्रा का मकसद अलग-अलग धर्मों के बीच भाईचारा बढ़ाना है।

बता दें कि अमेरिका राष्ट्रपति के ट्रुथ सोशल पर किए गए एक पोस्ट से तनाव का सिलसिला शुरू हुआ था। इसके बाद अमेरिकी कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस (USCCB) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोप के खिलाफ टिप्पणी की थी। बिशप कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष आर्कबिशप पॉल एस कोकली ने कहा कि पोप राष्ट्रपति के प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। उन्होंने ट्रंप की बातों को विभाजनकारी बताया।

दरअसल, ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट लिखकर पोप की विदेश नीति की आलोचना की थी। ट्रंप ने दावा किया कि अगर वे व्हाइट हाउस में नहीं होते, तो लियो 14वें कभी पोप नहीं बनते। ट्रंप ने उन्हें अपराध और विदेश नीति के मामलों में कमजोर बताया। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि उन्हें पोप के भाई लुईस ज्यादा पसंद हैं क्योंकि वे उनके समर्थक हैं। ट्रंप ने पोप को राजनीति छोड़कर अपने धार्मिक कर्तव्यों पर ध्यान देने की सलाह दी थी। हालांकि अमेरिका में जन्मे पहले पोप लियो 14वें ने अपना पूरा ध्यान शांति और कूटनीति पर लगा रखा है।