एशियन कप में ईरान की महिला फुटबॉल टीम का ‘मौन विद्रोह’, राष्ट्रगान का कर द‍िया बायकॉट

एशियन कप के उद्घाटन मुकाबले में ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी चर्चा मैदान से ज्यादा मैदान के बाहर हुई. इजरायल और अमेरिका की ओर से हुए सैन्य हमलों के बाद टीम ने राष्ट्रगान के दौरान चुप्पी साध ली. कैमरे जब खिलाड़ियों और कोच पर गए तो किसी के होंठ हिलते नजर नहीं आए. माहौल गोल्ड कोस्ट स्टेडियम में भावुक और गंभीर था. ईरान का राष्ट्रगान ‘Mehr-e Khavaran’ 1990 में अपनाया गया था. लेकिन इस बार टीम ने इसे गाने से परहेज किया. पिछले साल एशियन कप क्वालिफायर में टीम ने मौजूदा ईरानी झंडे को सलामी दी थी, ऐसे में इस बार का दृश्य बिल्कुल अलग था.

गोल्ड कोस्ट में स्टैंड्स में ईरानी समर्थकों का एक बड़ा वर्ग मौजूद था, जिन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले वाले झंडे लहराए. 1907 में अपनाए गए पहले आधिकारिक झंडे में शेर और सूरज का प्रतीक था, जिसे बाद में हरे-सफेद-लाल झंडे से बदल दिया गया. मैदान पर मुकाबला एकतरफा रहा. साउथ कोर‍िया की फुटबॉल टीम ने शुरू से दबदबा बनाया. पहले हाफ में कोरिया के पास 81 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रहा और 20 शॉट लगाए. 37वें मिनट में जांग सेल-गी का शॉट पोस्ट से टकराकर चोए यू-री के पास पहुंचा, जिन्होंने लेफ्ट फुट से गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई.

ब्रेक के बाद ईरान ने तीन बदलाव किए और आक्रामक रुख अपनाया. 56वें मिनट में जाहरा घनबारी को मौका मिला, लेकिन उनका शॉट सीधे कीपर किम मिन-जुंग के हाथों में चला गया. अंततः कोरिया ने मुकाबला 3-0 से अपने नाम किया. ईरान की कोच मरज‍ियेह जाफरी ने सैन्य हमलों और देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से जुड़े सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार किया. उन्होंने टूर्नामेंट से पहले कहा था कि 2022 के भारत संस्करण के मुकाबले इस बार ग्रुप ज्यादा कठिन है, लेकिन टीम अनुभव के साथ उतरी है और ईरानी महिलाओं की क्षमता दिखाना चाहती है.