कंफर्म टिकट के बावजूद जज को फ्लाइट से उतारा, एयरलाइन पर उपभोक्ता आयोग का एक्शन; 1 लाख रुपये मुआवजे का आदेश

छत्तीसगढ़ के एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश भूपेंद्र कुमार वासनिकर को कंफर्म टिकट होने के बावजूद दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट में चढ़ने से रोकना एयरलाइन को भारी पड़ गया. छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण मानते हुए एयरलाइन को एक लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है. आयोग ने कहा कि केवल टिकट का पैसा लौटाना यात्रियों को हुई मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी की भरपाई नहीं कर सकता.

यह मामला मई 2023 का है. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश भूपेंद्र कुमार वासनिकर अपने परिवार के साथ कश्मीर घूमकर लौट रहे थे. उन्होंने दिल्ली से रायपुर जाने के लिए चार कन्फर्म टिकट बुक कराए थे. परिवार समय से करीब चार घंटे पहले इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंच गया, लेकिन एयरलाइन ने लंबे इंतजार के बाद केवल उनकी पत्नी और दोनों बच्चों को बोर्डिंग पास दिए, जज वासनिकर को यह कहकर फ्लाइट में बैठाने से मना कर दिया गया कि सीट उपलब्ध नहीं है.

जज वासनिकर ने विरोध किया और सभी चार यात्रियों को साथ यात्रा कराने की मांग की, लेकिन एयरलाइन नहीं मानी. मजबूर होकर उन्होंने पत्नी और बच्चों को अकेले रायपुर भेजा, जबकि खुद दिल्ली में रुकना पड़ा. अगले दिन उन्होंने इंडिगो की फ्लाइट का लगभग 18,823 रुपये का नया टिकट खरीदा. इसके अलावा होटल, भोजन और आने-जाने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा.

जज भूपेंद्र कुमार वासनिकरद्वारा आरोप लगाया गया कि एयरलाइन ने 7,204 रुपये में खरीदी गई उनकी कंफर्म सीट को बिना सूचना किसी दूसरे यात्री को करीब 40 हजार रुपये में बेच दिया. आयोग ने कहा कि एयरलाइन इस आरोप का संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी. रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि अगले दिन जज को दूसरी एयरलाइन में सीट मिल गई, जिससे एयरलाइन का यह दावा कमजोर पड़ गया कि कोई वैकल्पिक फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी.

एयरलाइन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ओवरबुकिंग विमानन उद्योग में सामान्य और डीजीसीए के नियमों के तहत मान्य प्रक्रिया है. कंपनी ने दावा किया कि उसने नियमानुसार टिकट कीमत का चार गुना मुआवजा लौटा दिया था और वैकल्पिक फ्लाइट उपलब्ध कराने की कोशिश भी की थी. साथ ही यह भी कहा कि शिकायत काफी देर से दायर की गई.

उपभोक्ता आयोग ने कहा कि कन्फर्म टिकट होने के बावजूद यात्री को बोर्डिंग से वंचित करना गंभीर लापरवाही है. सिर्फ डीजीसीए के नियमों के अनुसार धनवापसी कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, यदि यात्री को अनावश्यक मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा हो. आयोग ने एयरलाइन को 45 दिनों के भीतर एक लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करने का निर्देश दिया. यह फैसला उन यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें ओवरबुकिंग के कारण कंफर्म टिकट होने के बावजूद यात्रा से वंचित होना पड़ता है.