शिवरात्रि पर देश को मिली पहली ‘किन्नर शंकराचार्य’, हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक

महाशिवरात्रि पर देश को पहली ‘किन्नर शंकराचार्य’ मिलीं हैं। मां वैष्णो किन्नर अखाड़े की प्रमुख व किन्नर महामंडलेश्वर ष्हिमांगी सखीश् को किन्नर शंकराचार्य बनाया गया है। भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में उनका पट्टाभिषेक किया गया। साथ ही राजस्थान की धर्मनगरी पुष्कर में ‘किन्नर शंकराचार्य पीठ’ की स्थापना की घोषणा भी की गई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लालघाटी में महाशिवरात्रि पर ‘किन्नर धर्म सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था। इसमें एक नए धार्मिक इतिहास का सूत्रपात किया है। सम्मेलन में किन्नर महामंडलेश्वर ‘हिमांगी सखी’ को देश की पहली ‘किन्नर शंकराचार्य’ घोषित कर उनका विधिवत पट्टाभिषेक किया गया।

किन्नर धर्म सम्मलेन में एक और बड़ा निर्णय लिया गया। इसमें नई परंपरा की शुरुआत हुई के साथ ही राजस्थान के पुष्कर को देश की पहली ‘किन्नर शंकराचार्य पीठ’ के रूप में स्थापित करने की घोषणा की गई। अब से हिमांगी सखी इसी पीठ की कमान संभालेंगी। आयोजन के दौरान किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास मौजूद रहे और सारे कार्यक्रम विधि विधान से संपन्न कराए। किन्नर वैष्णव अखाड़ा ने यह आयोजन किया था।

किन्नर महामंडलेश्वर बनने वाली व किन्नर वैष्णव अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हैं। धर्म जगत में वे एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं, जिनमें वे ‘ मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा ’ की प्रमुख हैं। वे दुनिया की पहली ‘किन्नर भागवत कथा वाचक’ भी हैं। बता दें कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सनातन धर्म और किन्नर समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं। भोपाल में किन्नर धर्म सम्मेलन में किन्नर शंकराचार्य की घोषणा के अलावा एक बड़ा दावा और किया जा रहा है। इसमें 60 से अधिक किन्नरों की हिन्दू धर्म में घर वापसी का दावा किया गया है। आयोजकों और किन्नर जूना अखाड़ा की प्रमुख डॉ. लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की मौजूदगी में बताया गया कि धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों ने पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है। बाकायदा मंच से यह जानकारी दी गई कि मुस्लिम धर्म अपना चुके इन किन्नरों का वैदिक रीति-रिवाज और शुद्धिकरण प्रक्रिया के माध्यम से ‘घर वापसी’ कराई गई।

बताया जा रहा है कि भव्य धार्मिक आयोजन में देशभर से आए संत-महात्माओं और किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच हुए इस पट्टाभिषेक को किन्नर समाज को हिन्दू धर्म की मुख्य धारा में शामिल करने का बड़ा अभियान माना जा रहा है।

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