कोरबा : प्राचार्य और व्याख्याता के बीच छात्रों के सामने हुई मारपीट, मचा हड़कंप

कोरबा: जिस विद्यालय में विद्यार्थियों को संस्कार, अनुशासन और नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता है, उसी शिक्षा के मंदिर में नए शिक्षा सत्र के पहले दिन ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाली में प्राचार्य मनोज सराफ और फिजिक्स व्याख्याता प्रखर पांडेय के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि स्थिति मारपीट तक पहुंच गई। इस पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी छात्र-छात्राएं बने, जो अपने भविष्य का निर्माण करने विद्यालय पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि विद्यालय में प्रायोगिक सामग्री और फिजिक्स रजिस्टर के कथित फर्जी संधारण को लेकर दोनों के बीच कई माह से तनाव चल रहा था। आरोप है कि रजिस्टर में कथित अनियमितताओं को वैध दर्शाने के लिए प्राचार्य द्वारा दबाव बनाया जा रहा था, जिसका व्याख्याता प्रखर पांडेय विरोध कर रहे थे. इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद लगातार हो रहा था। गर्मी की छुट्टियों के दौरान मामला शांत दिखाई दिया, लेकिन जैसे ही नए सत्र का पहला दिन आया, दबा हुआ विवाद विस्फोट बनकर सामने आ गया।

विद्यालय परिसर में पहले तीखी बहस हुई, फिर गाली-गलौज और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि अन्य शिक्षकों को बीच-बचाव के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम पाली के निर्देश पर नायब तहसीलदार सुजीत पाटले स्कूल पहुंचे। मौके पर सभी संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच प्रतिवेदन कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गुरुजन स्वयं अनुशासन और मर्यादा की सीमाएं लांघने लगें, तब विद्यार्थियों को आदर्श व्यवहार का पाठ कौन पढ़ाएगा। यदि फर्जी संधारण और खरीदी से जुड़े आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल दो व्यक्तियों का विवाद नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

पाली स्कूल की यह घटना अब केवल एक आपसी विवाद नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गई है। यदि समय रहते विवाद की गंभीरता को समझा जाता तो शायद शिक्षा के मंदिर में यह शर्मनाक दृश्य देखने को नहीं मिलता। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।