नागपुर में RSS मुख्यालय और स्मृति मंदिर में ‘रेडिएशन’ की धमकी, गुमनाम लेटर से हड़कंप
नागपुर से आई एक चौंकाने वाली खबर ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. एक गुमनाम लेटर में ‘रेडियोएक्टिव’ हमले की धमकी दिए जाने के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया. मामला साधारण धमकी का नहीं, बल्कि ‘सीज़ियम-137’ जैसे खतरनाक रेडियोधर्मी पदार्थ के इस्तेमाल के दावे से जुड़ा है, जिसने इसे और गंभीर बना दिया है. खास बात यह है कि जिन स्थानों का जिक्र किया गया है, वे न सिर्फ संवेदनशील हैं बल्कि देश के एक बड़े वैचारिक संगठन से भी जुड़े हुए हैं. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह किसी की शरारत है या फिर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की सोची-समझी कोशिश. फिलहाल एजेंसियां हर एंगल से जांच में जुटी हैं और इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है.
यह गुमनाम लेटर नागपुर के पुलिस आयुक्त को भेजा गया था. इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महाल स्थित मुख्यालय और रेशीमबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर में रेडियोएक्टिव पदार्थ डाले जाने का दावा किया गया. लेटर में ‘डीएसएस’ नाम के एक कथित संगठन का जिक्र किया गया है और संघ के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है.
27 अप्रैल को डाक के जरिए पहुंचे इस गुमनाम लेटर में नागपुर के कई संवेदनशील स्थानों पर रेडियोएक्टिव पदार्थ फैलाने का दावा किया गया. इससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं. लेटर में दावा किया गया कि महाल स्थित संघ मुख्यालय, रेशीमबाग के डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर और मेट्रो परिसर में ‘सीजियम-137’ नाम का रेडियोएक्टिव पाउडर डाला गया है. साथ ही यह भी कहा गया कि यह पदार्थ बेहद खतरनाक है और इससे कई लोग प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा दोसर भवन चौक के पास डेटोनेटर रखे जाने का भी जिक्र किया गया. धमकी मिलने के बाद पुलिस और एटीएस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की. संबंधित सभी स्थानों पर एनडीआरएफ और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों की टीमों को बुलाया गया और गहन जांच की गई. हालांकि शुरुआती जांच में कहीं भी किसी संदिग्ध रेडियोएक्टिव पदार्थ के संकेत नहीं मिले हैं, जिससे थोड़ी राहत जरूर मिली है.
इस पूरे मामले को देखते हुए एटीएस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच तेज कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि लेटर भेजने वाला कौन है और इसके पीछे उसकी मंशा क्या थी. जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ दिन पहले नागपुर के एक इलाके में डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ें भी बरामद हुई थीं. लेटर में दावा किया गया कि यह सामग्री भी उसी संगठन ने रखी थी, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि यह धमकी वास्तविक थी या सिर्फ डर फैलाने के लिए की गई शरारत. हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इसे हल्के में नहीं ले रही हैं और हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि रेडियोएक्टिव पदार्थ का नाम लेकर धमकी देना आम नहीं है, इसलिए इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
