इथियोपिया में मिली 15 लाख साल पुरानी इंसानी खोपड़ी, वैज्ञानिकों ने 3D तकनीक से तैयार किया चेहरा

वैज्ञानिकों की एक टीम ने इथियोपिया में मिली 15 लाख साल पुरानी एक खोपड़ी के जीवाश्म की मदद से इंसानों के पूर्वजों के बारे में नई जानकारी दी है. इस खोपड़ी को DAN5 नाम दिया गया है. डॉ. करेन बाब और उनके साथियों ने कंप्यूटर की मदद से इस खोपड़ी का चेहरा फिर से बनाया है. यह अफ्रीका में मिली अब तक की सबसे सुरक्षित और पूरी खोपड़ी है. इसे देखकर पता चला है कि शुरुआती इंसान एक-दूसरे से कितने अलग थे. इस खोज ने वैज्ञानिकों की पुरानी सोच को बदल दिया है कि इंसान धीरे-धीरे कैसे विकसित हुए.

नेचर कम्यूनिकेशंस में छपी यह रिपोर्ट बताती है कि इंसान कैसे विकसित हुए. वैज्ञानिकों ने माइक्रो-सीटी स्कैनिंग और 3D तकनीक का इस्तेमाल करके खोपड़ी के बिखरे हुए टुकड़ों को एक साथ जोड़ा है. खोज करने वाली टीम को चेहरे के 4 हिस्से और दांत मिले थे. उन्होंने लगभग 1 साल की मेहनत के बाद इन टुकड़ों को दिमाग वाली हड्डी के साथ जोड़कर पूरी खोपड़ी तैयार की.

यह खोपड़ी काफी अलग है क्योंकि इसका दिमाग छोटा था और चेहरा बहुत पुराना दिखता था. डॉ. बॉब ने बताया कि हमें पहले ही पता था कि इसका दिमाग छोटा है लेकिन अब चेहरा बनाने के बाद पता चला है कि यह अपनी ही प्रजाति के दूसरे लोगों से भी बहुत अलग और पुराना दिखता था.

वैज्ञानिकों का मानना है कि शायद इथियोपिया के इस इलाके में रहने वाले पूर्वजों ने अपना पुराना रूप ही बरकरार रखा था जबकि बाकी दुनिया में इंसान बदल रहे थे. इस चेहरे की नाक चपटी थी और इसके दाढ़ के दांत बहुत ही बड़े थे. वैज्ञानिकों की मानें तो ये ऐसे लक्षण हैं जो बहुत ही पुराने समय के इंसानों में पाए जाते थे. जब वैज्ञानिकों ने इस खोपड़ी की तुलना दूसरे जीवाश्मों से की तो उन्हें एक अनोखी चीज दिखी. इस खोपड़ी का दिमाग तो होमो इरेक्टस जैसा था लेकिन चेहरा और दांत अपने पूर्वजों जैसे थे. हैरानी की बात यह है कि ऐसा मेल अब तक सिर्फ यूरोप और एशिया में मिली खोपड़ियों में देखा गया था. अफ्रीका में इस तरह की बनावट पहली बार मिली है.

वैज्ञानिकों को पता चला है कि DNA5 दो अलग-अलग तरह के पत्थर के औजार इस्तेमाल करता था. डॉ. सिलेशी सोमाव ने बताया कि यह पूर्वज साधारण पत्थर के औजार और कुल्हाड़ियां दोनों बनाना जानता था. किसी एक पूर्वज के पास इन दोनों तरह के औजारों का मिलना बहुत बड़ी बात है क्योंकि यह इंसानी समझदारी के शुरुआती सबूतों में से एक हैं. अब वैज्ञानिक इस खोपड़ी की तुलना यूरोप में मिले इंसानों की हड्डियों से करेंगे.

 

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