बर्फ के समुंदर में सोता मिला 40000 साल पुराना जिंदा ‘हैवान’!

साइंस फिक्शन हॉरर फिल्म की तरह वैज्ञानिकों ने वायरस को जिंदा किया है. ये वायरस पृथ्वी पर तबाही मचा सकता है. जानते हैं वैज्ञानिकों ने इसे जिंदा क्यों किया. कोरोना वायरस और हंता वायरस का भयानक मंजर आज भी मौजूद है. कोरोना महामारी के दौरान कई लोगों ने अपने प्यार और करीबी की खो दिया था. इसी दौरान वैज्ञानिकों ने एक नए वायरस को लेकर चिंता जाहिर की है. दरअसल वैज्ञानिकों ने एक वायरस को पुनर्जीवित किया है जो कि महामारी का कारण बन सकता है. वैज्ञानिकों ने वायरस को जिंदा किया है. दरअसल यह वायरस अलास्का में 40,000 सालों से जमा हुआ है. कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पर्माफ्रॉस्ट जमी हुई मिट्टी, चट्टान और बर्फ के मिश्रण को लिया है. इसके बाद इसे पिघला कर देखा गया. इससे पता चला कि इसमें सूक्ष्मजीव है जो कि धीरे-धीरे जिंदा हो रहे हैं. शुरुआती समय में कुछ बदलाव नहीं हुआ लेकिन कुछ महीनों में सूक्ष्मजीव काफी बड़ी मात्रा में फैल करें. जो कि चिंता का विषय है. दरअसल आर्कटिक के पिघलने से यह वायरस खुद से जग सकता है. जो कि तबाही फैला सकता है. वैज्ञानिक ने बताया है कि इस वायरस से इंसानों को किसी तरह का खतरा नहीं है. यह वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं कर सकता है. शोधकर्ता के अनुसार चेतावनी दी है कि यह वायरस गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं.

यह वायरस जिंदा होते हैं तो वह कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैस छोड़ते हैं जो कि जलवायु परिर्वतन पर बुरा असर डाल सकता है. आर्कटिक की पिघलती हुई बर्फ तबाही मचा सकती है.