धमतरी में नक्सल उन्मूलन को बड़ी सफलता, 47 लाख के इनामी 9 हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

छत्तीसगढ़ : धमतरी जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को शुक्रवार को एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। आईजी अमरेश मिश्रा और धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार के समक्ष एक साथ 9 सक्रिय हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 5 महिला और 4 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जो लंबे समय से सीतानदी क्षेत्र सहित नगरी, मैनपुर और गोबरा इलाके में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली प्रतिबंधित माओवादी संगठन की ओडिशा स्टेट कमेटी के धमतरी–गरियाबंद–नुआपाड़ा डिवीजन से जुड़े थे। ये नक्सली संगठन में डीवीसीएम, एसीएम, एरिया कमेटी कमांडर और डिप्टी कमांडर जैसे अहम पदों पर कार्यरत रहे हैं। इन पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

ये नक्सली हुए आत्मसमर्पित

ज्योति उर्फ जैनी उर्फ रेखा – डीवीसीएम, सीतानदी एरिया कमेटी सचिव (8 लाख इनामी)

उषा उर्फ बालम्मा – डीवीसीएम टेक्निकल (डीजीएन) (8 लाख इनामी)

रामदास मरकाम उर्फ आयता उर्फ हिमांशु – नगरी एसीएम (5 लाख इनामी)

रोनी उर्फ उमा – सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर (5 लाख इनामी)

निरंजन उर्फ पोदिया – सीनापाली एससीएम टेक्निकल (5 लाख इनामी)

सिंधु उर्फ सोमड़ी – एसीएम (5 लाख इनामी)

रीना उर्फ चिरो – एसीएम, सीनापाली एरिया कमेटी (5 लाख इनामी)

अमीला उर्फ सन्नी – एसीएम, मैनपुर एलजीएस (5 लाख इनामी)

लक्ष्मी पूनेम उर्फ आरती – बॉडीगार्ड (1 लाख इनामी)

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में हथियार और सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी, जिसमें 2 इंसास राइफल, 2 एसएलआर, 1 कार्बाइन, 1 भरमार बंदूक, 67 राउंड, 11 मैगजीन, एक वॉकी-टॉकी और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री शामिल है।

धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों, बढ़ते दबाव और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया। पुलिस द्वारा दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांवों में पोस्टर, बैनर, पाम्फलेट, आत्मसमर्पित नक्सलियों की अपील और सिविक एक्शन कार्यक्रमों के जरिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा था। युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में कठिन जीवन, शासन की पुनर्वास सुविधाएं और पहले आत्मसमर्पण कर चुके साथियों के सुरक्षित जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

 

 

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