नेपाली चाय पर भारत की सख्‍ती के बाद उद्योग बंद होने के कगार पर, अब चीन और पाकिस्‍तान पर बालेन सरकार की नजर

काठमांडू: भारत के अड़चन के बाद नेपाल सरकार अब चाय निर्यात के लिए नये बाजारों की तलाश करेगी। नेपाल के अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी है कि देश की चाय की क्वालिटी सुधारने के साथ साथ नये विदेशी बाजारों की तरफ फोकस करना चाहिए। इसका मकसद भारत पर अपनी निर्भरता तेजी से कम करना है। भारत ने नेपाल से आने वाली चाय को लेकर जांच प्रक्रिया काफी सख्त कर दी है इससे 1 मई के बाद से नेपाली चाय का भारत में आना करीब करीब बंद हो गया था। हालांकि डिप्लोमेटिक कोशिशों के बाद भारतीय अधिकारी ढील देने पर सहमत हुए और 30 जून से नेपाली चाय का भारत में निर्यात फिर शुरू हो गया है। लेकिन अब नेपाल सिर्फ भारत पर अपने चाय निर्यात को लेकर निर्भर नहीं रहना चाहता है। नेपाल के अधिकारियों ने बालेन शाह की सरकार को सलाह दी है कि यूरोप और जापान नेपाली चाय के लिए अच्छे बाजार साबित हो सकते हैं। नेपाल चाय उद्योग के लोगों का कहना है कि उनका फोकस हाई क्वालिटी चाय के प्रोडक्शन पर होगी।

नेपाली अधिकारियों का मानना है कि भारत की तरफ से नेपाली चाय पर रोक लगना एक सबक की तरह है क्योंकि नेपाल अपना 86 प्रतिशत चाय भारतीय बाजारों में ही बेचता है। काठमांडू पोस्ट ने कृषि, वन और पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि भारत की तरफ से चाय पर जब क्वालिटी टेस्ट के बहाने रोक लगाई गई तो उसके बाद काठमांडू में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया। इस टास्क फोर्स ने सरकार को वैकल्पिक बाजार खोजने की सलाह दी है। हालांकि अभी ये रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए गये हैं।

भारत ने 1 मई को क्वालिटी को आधार बनाकर नेपाल चाय पर एक तरह से रोक लगा दी थी। इससे करीब 13 लाख टन नेपाली चाय को भारी नुकसान पहुंचा। नेपाल में चाय उद्योग पर इसका गंभीर असर हुआ है। इसके बाद नेपाल सरकार की तरफ से कूटनीतिक कोशिशें तेज की गईं और फिर 30 जून से फिर से नेपाली चाय के लिए भारतीय बाजार खुल गया है। नेपाल के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के डायरेक्टर दीपक खनाल ने कहा ‘हमने अब अपना ध्यान चाय की क्वालिटी सुधारने और मार्केट में विविधता लाने पर केंद्रित किया है।’