11 मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही है बिश्नोई को.. साबरमती जेल से बाहर नहीं निकालती है सरकार, पूरी नहीं होगी अमेरिका की डिमांड

अमेरिका ने भारतीय गैंगस्टरों पर सख्ती बढ़ाते हुए शिकंजा कसना शुरू किया है। इसी के तहत अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने भारत के कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के गिरोह से जुड़े गैंगस्टर नीतीश कौशल को अपनी मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल कर लिया है। इतना ही नहीं गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह के खिलाफ भी अमेरिका के न्याय विभाग और उसकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआई, कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस और यूरोप की कई एजेंसियों ने मिलकर ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ शुरू किया है। ऐसे में जब लॉरेंस बिश्नोई अहमदाबाद की उच्च सुरक्षा वाली साबरमती जेल में बंद है। तब अमेरिका ने गैंगस्टर पर सख्ती बढ़ाई है। इस सब के बीच लॉरेंस बिश्नोई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि अगर अमेरिका लॉरेंस को मांगता है तो भारत क्या कर सकता है?

अमेरिकी विभाग का कहना है अभी तक 37 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुए हैं। अमेरिका में दायर केस के केंद्र में लॉरेंस बिश्नोई संगठित अपराध गुट (OCG) है। वह जेल में रहते हुए भी गिरोह को चला रहा है। बरार उत्तरी अमेरिका में गिरोह का प्रबंधन करता था, जबकि रोहित गोदारा यूरोप में गतिविधियों को देखता था। दूसरा सिंडिकेट का सरगना 38 साल जगतार सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया है। वह असम की सिलचर जेल में बंद है। अमेरिका के अनुसार यह अलग अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोह है, जो भारत, कनाडा, अमेरिका व अन्य देशों में सक्रिय है। भगवानपुरिया बिश्नोई का पूर्व साथी है। अमेरिका के न्याय विभाग ने पंजाब से जुड़े तीन अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेटों के खिलाफ आरोप पत्र की घोषणा की। इसमें कहा गया है कि ये भारत, कनाडा, अमेरिका व यूरोप में सक्रिय हैं। आरोप है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बरार ने खालिस्तान समर्थक एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कराई थी।

लॉरेंस के मूवमेंट पर है पाबंदी

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई अगस्त 2023 से गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। गृह मंत्रालय द्वारा सीआरपीसी की धारा 268 (1) लागू किए जाने के कारण उसकी मूवमेंट पर पाबंदी है। इस नियम के अंतर्गत गृह मंत्रालय और राज्य प्रशासन सुरक्षा कारणों और कानून-व्यवस्था के खतरे को देखते हुए किसी भी खतरनाक कैदी को एक निश्चित अवधि के लिए एक ही जेल में रखने का आदेश देता है।
इस पाबंदी के चलते कोई भी अन्य राज्य पुलिस या जांच एजेंसी लॉरेंस को अपनी कस्टडी (ट्रांजिट रिमांड) में नहीं ले जा सकती। यदि किसी मामले में पूछताछ करनी हो या कोर्ट में पेशी हो, तो एजेंसियों या अदालत को साबरमती जेल में ही आना होता है या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का सहारा लेना पड़ता है।

लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में 2023 से एकांत कारावास में है। गैंगस्टर पर चौबीसों सीसीटीवी निगरानी रहती है। गृह मंत्रालय ने उस पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 303 लगाई हुई है। जिसका अर्थ है कि वह जेल से बाहर नहीं जा सकता। वह कोर्ट की सुनवाई में भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हिस्सा लेता है। अगर राज्य से बाहर की पुलिस को उससे पूछताछ करनी होती है, तो उसे जेल में ही आना होता है। एनआईए ने 2022 में बिश्नोई और अन्यों के खिलाफ जो आरोपपत्र दाखिल किया था, उसके अनुसार, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान और पंजाब में उसके खिलाफ 84 केस दर्ज हैं। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि अमेरिका भारत से मांग करने जा रहा है कि कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निखार की हत्या के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को उसके हवाले किया जाए। भारत और अमेरिका के बीच 1997 में प्रत्यावर्तन संधि हस्ताक्षरित हुई थी जिसके मुताबिक हत्या, आतंकवाद, बंधक बनाने व नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले ऐसे अपराधी को सौंपने की संबंधित देश मांग कर सकता है।

अमेरिका की मांग पर भारत बाध्य नहीं है। भारत ने भोपाल गैस कांड के बाद अमेरिका भाग निकले यूनियन कार्बाइड के प्रमुख बहेन एंडरसन के प्रत्यर्पण की मांग की थी लेकिन अमेरिका ने सबूतों की कमी का मुद्दा उठाकर एंडरसन को सौंपने से इनकार कर दिया था। इसी तरह 26/11 के आतंक हमलों के साजिशकर्ता और रेकी करने वाले डेविड कोलमैन हेडली को भी अमेरिका ने यह कहकर भारत के हवाले नहीं किया था कि अपराध कबूल करने को लेकर पली बार्गेनिंग समझौता हो चुका है।अब वह अमेरिका में अपनी सजा भुगतेगा। केवल 26/11 के अभियुक्त तहव्यूर राणा को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अमेरिका से भारत लाया जा सका। लॉरेंस बिश्नोई के ऊपर गृह मंत्रालय की सख्ती के चलते उसे घरेलू मामलों की जांच के लिए भी बाहर नहीं निकाला गया। चाहे गायक सिद्ध मूसावाला की हत्या हो या महाराष्ट्र के नेता बाबा सिद्दीकी का केस। दोनों में उंगलियां लॉरेंस बिश्नोई पर ही उठीं थीं। सलमान खान भी लंबे वक्त से लॉरेंस और उसके भाई अनमोल से खतरा महसूस कर रहे हैं। अभी तक अमेरिका का न्याय विभाग प्रत्यार्पण निवेदन अपने विदेश विभाग के जरिए भारत के विदेश मंत्रालय को नहीं भेजा है, लेकिन अमेरिका में भाई गैंगस्टरों पर शिकंजे ने लॉरेंज विश्नोई को सुर्खियों में ला दिया है।

जानकारों का कहना है कि अमेरिका का निवेदन मिलने पर विदेश मंत्रालय इस बारे में गृह मंत्रालय की राय लेगा यदि केंद्र सरकार को लगेगा कि इस निवेदन में दम है तो वह उसे भारतीय न्यायालय के सम्मुख पेश करेंगी। वहां देखा जाएगा कि क्या प्रत्यावर्तन संधि की शर्तें पूरी होती हैं। तब अदालत अपने निष्कर्ष केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगी। तब यह केंद्र सरकार पर निर्भर करेगा कि यह लॉरेंस बिश्नोई को अमेरिका प्रत्यार्पित करे या न करे। भारत यह भी कह सकता है लाॅरेंस बिश्नोई को यहीं पर जेल में सजा भुगतनी होगी। इसके बाद ही उसके प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा। भारत को बिश्नोई के प्रत्यर्पण के लिए बाध्य नहीं किया सकता। इस मामले में विकास यादव का मामला एक उदाहरण है। जब अमेरिकी अभियोजनकर्ताओं ने आरएंडएडब्ल्यू (रॉ) के पूर्व अधिकारी विकास यादव पर खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश का आरोप लगाया था तो दिल्ली पुलिस ने यादव पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया उस पर भारत में कानूनी कार्रवाई होगी।