प्रज्ञानानंदा नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने, फाइनल राउंड में जर्मनी के विन्सेंट को हराया

भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने इतिहास रचते हुए नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीत लिया है। 20 साल के प्रज्ञानानंदा इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। टूर्नामेंट के आखिरी दिन प्रज्ञानानंदा 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर थे। उन्होंने क्लासिकल मुकाबला जीतकर 3 अंक हासिल किए और कुल 18 अंकों के साथ खिताब अपने नाम कर लिया। नॉर्वे चेस टूर्नामेंट को सबसे ज्यादा 7 बार मैग्नस कार्लसन ने जीता। 2025 में भी वही चैंपियन थे।

टूर्नामेंट के आखिरी राउंड में अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो 15.5 अंकों के साथ टॉप पर थे। लेकिन उनका मुकाबला ड्रॉ रहा और फैसला आर्मागेडन टाईब्रेकर में गया।

इससे प्रज्ञानानंदा के लिए खिताब जीतने का रास्ता खुल गया। वेस्ली सो ने टाईब्रेकर तो जीत लिया, लेकिन उन्हें केवल 1.5 अंक मिले। इस तरह उनके कुल 17 अंक हुए, जो प्रज्ञानानंदा से एक कम थे। फ्रांस के अलीरजा फिरोजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। आखिरी दौर में मैग्नस कार्लसन ने गुकेश को हराया, लेकिन वह भी खिताब नहीं जीत सके। कार्लसन 13 अंकों के साथ 5वें स्थान पर रहे।

इस टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में प्रज्ञानानंदा का प्रदर्शन साधारण रहा, लेकिन बाद के मुकाबलों में उन्होंने शानदार वापसी की। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक वर्ल्ड नंबर-1 और सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराना रहा। प्रज्ञानानंदा भारत के दूसरे ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया। इससे पहले 2007 में विश्वनाथन आनंद ने लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में शिकस्त दी थी।

प्रज्ञानानंदा ने वह कर दिखाया जो भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद भी नहीं कर पाए थे। मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी अब तक यह टूर्नामेंट नहीं जीत सके हैं।

2013 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट में पहली बार किसी भारतीय ने खिताब जीता है। प्रज्ञानानंदा दूसरी बार नॉर्वे चेस में खेल रहे थे। गुकेश 8 अंकों के साथ छठे (आखरी) स्थान पर रहे।