पहली बार रोबोटिक हाथों ने 10,000 किलोमीटर दूर से इंदौर में किया ऑपरेशन, कंट्रोलर था सात समंदर पार!
क्या आप यह सोच सकते हैं कि एक डॉक्टर सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में बैठा हो और भारत के किसी शहर में मरीज का ऑपरेशन कर रहा हो? सुनने में यह बले ही मूवी का सीन लग रहा हो, लेकिन टेक्नोलॉजी के सहारे यह आज हकीकत बन चुका है. मेडिकल साइंस में एक ऐसा धमाका हुआ है, जिसने हजारों किलोमीटर की दूरियां मिटा दी है. आस्ट्रेलिया के पर्थ में बैठे भारतीय डॉक्टर और इंदौर के ऑपरेशन थिएटर में रखे रोबोटिक हाथों के बीच एक दो नहीं बल्कि 10,000 किलोमीटर का फासला था, लेकिन मेडिकल साइंस के बदौलत सर्जरी सफल हुई. यह दुनिया की सबसे लंबी दूरी वाली टेलिसर्जरी में से एक है.
भारत के फेमस बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. मोहित भंडारी ने पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित रॉयल ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ सर्जन्स के वार्षिक सम्मेलन के दौरान यह कारनामा किया. उन्होंने इंदौर के एक अस्पताल में एडमिट मरीज की गैस्ट्रोजेजनोस्टॉमी सर्जरी की. यह वजन कम करने के लिए की जाने वाली कठिन प्रक्रिया है, जिसमें पेट को छोटी आंत के एक हिस्से जेजुनम से जोड़ा जाता है. 10,000 किलोमीटर दूर से हुई इस सर्जरी की सबसे खास बात यह थी कि इसमें इस्तेमाल की गई पूरी तकनीक मेड इन इंडिया है. डॉ. भंडारी ने भारत की कंपनी SS Innovations International द्वारा तैयार किया गया SSI Mantra सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम और MantrAsana टेलिसर्जन कंसोल का इस्तेमाल किया.
सर्जरी करने के लिए डॉ. भंडारी ने पर्थ में एक हेडसेट पहना, जिससे उन्हें मरीज के शरीर के अंदर का नजारा 3D और हाई-डेफिनिशन यानी HD में दिखाई दे रहा था. उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह खुद इंदौर के ऑपरेशन थिएटर में ही मौजूद हों. पर्थ में डॉक्टर के हाथों की हर हरकत को इंदौर में लगे रोबोटिक हाथों ने हूबहू दोहराया. इस रोबोटिक सिस्टम की सटीकता 0.1 mm है, जो इंसानी हाथों की तुलना में भी ज्यादा सटीक और परफेक्ट है.
इस पूरी प्रोसेस में सबसे बड़ी चुनौती थी लेटेंसी, यानी सिग्नल पहुंचने में देरी की. पर्थ से इंदौर और वापस पर्थ तक सिग्नल पहुंचने में मात्र 150 मिलीसेकंड से कम का समय लगा. इसे इस तरह से समझें कि इंसान के पलक झपकने में भी 150 से 400 मिलीसेकंड का समय लगता है. भारत जैसे देश में आज भी गांवों और छोटे शहरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है. अक्सर गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों में ले जाना पड़ता है, जिसमें समय और पैसा दोनों ज्यादा लगता है. इस सफल टेलिसर्जरी ने उम्मीद जाहिर की है कि आने वाले समय में दिल्ली या मुंबई का कोई बड़ा सर्जन किसी दूरदराज के गांव या पहाड़ी इलाके के अस्पताल में बैठे मरीज का ऑपरेशन कर सकेगा.
