रूस ने एक झटके में बेचा 44 टन सोना, क्यों, क्या और अब गिरेंगे सोने के भाव

रूस दुनिया के उन देशों में से एक है जहां सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है. हालांकि रूस ने हाल ही में जो किया उसने हर किसी को हैरान कर दिया है. रूस ने साल 2026 की पहली छमाही में करीब 44 टन सोना बेच दिया है. ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई हैं, रूस का यह कदम कई सवाल खड़े कर रहा है. निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि आखिर रूस ने अपने गोल्ड रिजर्व में कटौती क्यों की और इसका आगे क्या असर पड़ सकता है.

सेंट्रल बैंक की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई की शुरुआत तक उसके पास 73.4 मिलियन ट्रॉय औंस यानी करीब 2,282 मीट्रिक टन सोना बचा है. साल की शुरुआत के मुकाबले यह करीब 1.4 मिलियन ट्रॉय औंस यानी लगभग 43.5 टन कम है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से रूस के पास मौजूद गोल्ड रिजर्व की कुल वैल्यू करीब 299 अरब डॉलर आंकी गई

आमतौर पर किसी देश का गोल्ड रिजर्व उसकी आर्थिक मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है. मुश्किल समय में यही रिजर्व देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है. ऐसे में रूस का अपने भंडार से सोना बेचना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है.

हालांकि, रूस के सामने एक बड़ी चुनौती पश्चिमी देशों या फिर वेस्टर्न सैंक्शंस हैं. यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं. इन्हीं प्रतिबंधों की वजह से रूस का सेंट्रल बैंक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसानी से सोना बेच नहीं सकता. यानी उसके लिए विदेशी खरीदारों तक पहुंच अब पहले जैसी नहीं रही है.

इसके बावजूद घरेलू स्तर पर या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से रिजर्व में बदलाव किए जा रहे हैं. हालांकि, सेंट्रल बैंक ने ये साफ नहीं किया है कि ये सोना किन खरीदारों को बेचा गया .

रूस के इस कदम का असर फिलहाल वैश्विक सोने की कीमतों पर नहीं दिखेगा. इसकी वजह यह है कि सोने की कीमतें इस समय कई दूसरे फैक्टर्स से भी प्रभावित हो रही हैं. इनमें पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद, महंगाई की चिंता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर फैसले पर टिकी हुई हैं.

आने वाले समय में निवेशकों की नजर रूस की गोल्ड पॉलिसी, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की खरीद और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात पर रहेगी. यही फैक्टर तय करेंगे कि सोने की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंचेंगी या फिर उनमें कुछ नरमी देखने को मिलेगी.